n NBT न्यूज, ग्रेटर नोएडा
वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा। कुछ ऐसा ही दहेज उत्पीड़न के मामलों में भी हो सकता है। हाल ही में दीपिका नागर की मौत समेत कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें मायका पक्ष शादी को बचाने के लिए अंत समय तक कोशिश करता रहा और बेटी की जान चली गई। दहेज उत्पीड़न के बढ़ते मामलों और इसके सभी पहलुओं पर रविवार को NBT ने ग्रेटर नोएडा के डेल्टा-1 कम्यूनिटी सेंटर में संवाद किया। इसमें शहर और क्षेत्र में प्रमुख लोगों ने हिस्सा लेकर दहेज की कुप्रथा के बारे में अपने विचार रखे और इससे बचने के लिए खुद से पहले करने पर बल दिया। शिक्षा और बेमेल शादियों से बचने की सलाह दी तो साथ ही बेटी की मौत होने तक उसके घर को बचाने के प्रयास के बजाय उसे तनावपूर्ण माहौल से निकलने पर भी बल दिया।
'समान हो लड़का-लड़की के एजुकेशन का स्तर'
लोगों ने कहा कि यदि रिश्तों को बचाना है तो दिखावे और दौलत की दौड़ छोड़कर सम्मान, संस्कार और आपसी समझ को फिर से केंद्र में लाना होगा। चर्चा में समाज के दोहरे मापदंडों पर भी गहरी चिंता जताई गई, जहां बेटी के लिए अलग और बहू के लिए अलग नियम होते हैं। रिश्ते को रबड़ की तरह खींचते रहने से बेहतर है कि अगर रोज घुटने की नौबत आए और आत्मसम्मान खतरे में हो, तो समय रहते कानूनी और सामाजिक प्रक्रिया से शालीनतापूर्वक अलग हो जाना चाहिए। इससे जहां बेटियों की जान बच सकेगी और वहीं दोनों परिवार मुकदमेबाजी में फंस कर बर्बाद भी न होंगे। शादियों को दौलत के तराजू में तोलना बंद करना होगा। दहेज की लिस्ट पढ़ने पर रोक पर बल दिया गया। बिना दहेज शादी करने वालों को सम्मानित करने पर भी सहमति बनी। इस दौरान कहा गया कि लड़का-लड़की के आत्मनिर्भर होने पर ही शादी की जाए। दिखावे के बजाय बच्चों की शिक्षा और संस्कारों पर निवेश करें। बेमेल शादी नहीं होनी चाहिए। मतलब लड़का और लड़की के एजुकेशन का स्तर समान हो, दोनों परिवारों की आर्थिक हैसियत भी समान हो।



