थोक महंगाई दर निकालने का समीकरण बदलने जा रहा है। सरकार ने तय किया है कि अगले 5 वर्षों में होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का उपयोग चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया जाएगा और इसकी जगह पर प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) का उपयोग किया जाएगा। कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री में प्रिंसिपल इकनॉमिक एडवाइजर प्रवीण महतो ने मंगलवार को कहा कि इससे महंगाई के रुझानों का बेहतर ढंग से आकलन हो सकेगा।
महतो ने कहा कि मिनिस्ट्री 15 जून को 2012-13 के बजाय नए बेस ईयर 2022-23 के साथ WPI की संशोधित सीरीज जारी करेगी। साथ ही, PPI की भी नई सीरीज जारी होगी। इसमें आउटपुट PPI, ट्रायल इनपुट PPI और सर्विसेज PPI के रूप में तीन इंडेक्स होंगे। शुरू में सर्विसेज PPI में 7 सेवाएं शामिल होंगी। इनमें बैंकिंग, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन, इंश्योरेंस, पेंशन फंड मैनेजमेंट, रेलवे, एयर-पैसेंजर और दूरसंचार को रखा जाएगा। महतो ने कहा कि 5 साल की अवधि में WPI से PPI पर जाने में यूजर्स को पर्याप्त समय मिल जाएगा।
WPI और PPI में अंतर? : PPI को WPI के मुकाबले इंफ्लेशन का बेहतर पैमाना माना जाता है। यह उत्पादकों को उनकी वस्तुओं और सेवाओं के लिए देश-विदेश में मिलने वाली कीमतों में औसत बदलाव की तस्वीर पेश करता है। वहीं, WPI किसी कमोडिटी की खरीद-फरोख्त के शुरुआती चरण में कीमतों में होने वाले बदलावों की जानकारी देता है।
आउटपुट और इनपुट PPI: आउटपुट PPI की गणना उत्पादक को मिलने वाले दाम के आधार पर होती है। यह बेसिक प्राइस होता है, जिसमें नेट टैक्स, ट्रेड और ट्रांसपोर्ट मार्जिन नहीं होता। इनपुट PPI कच्चे माल के खरीद मूल्य पर आधारित होता है। इसमें ट्रेड और ट्रांसपोर्ट मार्जिन शामिल होता है।
PPI से फायदा: अमेरिका, जर्मनी, चीन और फ्रांस सहित विकसित देशों में PPI का ही उपयोग होता है। इंटरनैशनल मॉनेटरी फंड ने भी इसके उपयोग की सलाह दी है। आउटपुट और इनपुट, दोनों तरह के PPI के आंकड़ों से कच्चे माल और तैयार माल की कीमतों के ट्रेंड को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। यह भी दिखेगा कि कच्चे माल पर उत्पादकों के लिए जो महंगाई हो, उसका असर तैयार उत्पादों में किस तरह पड़ता है। दोनों PPI के उपयोग से महंगाई की डबल काउंटिंग से बचा जा सकेगा, जो WPI में हो जाता है। WPI में केवल वस्तुओं को, PPI में सेवाओं को भी रखा जाता है।
आइटम बढ़े: नए तरीके में आइटम्स की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इसमें इलेक्ट्रिसिटी ग्रुप में सोलर और विंड एनर्जी को शामिल गया है। न्यूक्लियर इलेक्ट्रिसिटी भी है। क्रूड पेट्रोलियम और नैचरल गैस को प्राइमरी आर्टिकल्स से फ्यूल एंड पावर में रख दिया गया है, जिसमें कोयला, बिजली पहले से हैं।


