n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) में विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला प्रकृति अभिलेख और जलवायु भविष्य की शुरुआत हुई।
संस्थान के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर ने बताया कि पृथ्वी का इतिहास गवाह है कि जो प्रजातियां समय के साथ खुद को ढाल नहीं पाईं, वे विलुप्त हो गईं। मुख्य अतिथि पद्मश्री जल योद्धा उमा शंकर पांडेय ने बताया कि कैसे 'खेत में मेड़, मेड़ पर पेड़' अभियान के जरिए भूजल स्तर में 1.34 मीटर का सुधार हुआ है।


