n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे की नियुक्ति और लंबे समय से पद पर बने रहने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई फिलहाल टल गई है। जस्टिस जसप्रीत सिंह ने स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया और निर्देश दिया कि याचिका को चीफ जस्टिस या वरिष्ठ जज से ऐसी नई बेंच के लिए नामित कराया जाए जिसमें वे सदस्य न हों। इसके बाद पीठ ने नई बेंच नामित होने पर याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
याचिका कर्मेश प्रताप सिंह ने दाखिल की है। इसमें क्वो वारंटो रिट की मांग करते हुए कहा गया है कि 2009 में दुबे की नियुक्ति सेवा नियमों के विपरीत हुई, क्योंकि 1974 की नियमावली में चयन श्रेणी पदों हेतु अधिकतम आयु 52 वर्ष थी और वे उससे अधिक थे। आरोप है कि वीआरएस के दिन ही उन्हें नियुक्ति मिली, बिना विज्ञापन, प्रतिस्पर्धी चयन, लोक सेवा आयोग परामर्श और अनुच्छेद 187 के अनुमोदन के। याचिका में कहा गया कि नियमों में कथित संशोधन और 'सर्विस ट्रांसफर' व्यवस्था के सहारे सेवा विस्तार दिए गए। दावा है कि वे 2019 में 62 वर्ष पर सेवानिवृत्त हो चुके थे, फिर भी 68+ आयु में पद पर हैं। RTI में वैध आदेश/रेकॉर्ड न मिलने, वित्तीय अनियमितताओं और उत्पीड़न के आरोप भी लगाए गए हैं।


