ग्राहक के खाते से निकाले "80 हज़ार, बैंक पर जुर्माना

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केनरा बैंक पर ग्राहक के खाते से बिना अनुमति 80 हजार रुपये निकालने और खाता निष्क्रिय करने का आरोप है। जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक को सेवा में कमी का दोषी पाया। बैंक को ग्राहक को मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है।

rs 80000 withdrawn from customers account bank fined rs 15000

n NBT न्यूज, आरडीसी

बिना जानकारी दिए बैंक खाते से धनराशि निकालने और बाद में खाता निष्क्रिय करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए ग्राहक को 15 हजार रुपये का मुआवजा और वाद व्यय देने का आदेश बैंक को दिया है। जानकारी के मुताबिक, मसूरी की जफर कॉलोनी निवासी सलीम का बचत खाता मसूरी स्थित केनरा बैंक शाखा में है। सलीम ने आयोग को बताया कि फर्नीचर निर्माण का काम किया था, जिसके भुगतान के रूप में चार अप्रैल 2019 को 1.10 लाख रुपये का चेक मिला। यह चेक उन्होंने बैंक में जमा कर दिया। छह अप्रैल को चेक क्लियर होने के बाद उनके खाते में कुल 1.17 लाख रुपये से अधिक की राशि दिखाई देने लगी।

सलीम के अनुसार, उन्होंने खाते से 36,500 रुपये निकाले थे। इसके बाद बैंक ने उनकी जानकारी और अनुमति के बिना खाते से करीब 80 हजार रुपये और निकाल लिए। शिकायत पर बैंक ने राशि दोबारा खाते में जमा कर दी, लेकिन खाता निष्क्रिय कर दिया। इससे वह कोई लेनदेन नहीं कर सके। वहीं, सुनवाई के दौरान बैंक ने कहा कि संबंधित चेक क्लीयरेंस प्रक्रिया में तकनीकी कारणों से खाते में जमा हो गया था, जबकि भुगतानकर्ता ने बाद में उसका भुगतान रोक दिया था। बैंक के अनुसार, इसी वजह से शेष राशि को खाते से समायोजित किया गया। बैंक का यह भी कहना था कि ग्राहक को राशि वापस करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार पुंडीर ने आदेश दिया कि बैंक ग्राहक को मानसिक पीड़ा और असुविधा के लिए 10 हजार रुपये प्रतिकर तथा 5 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अदा करे। आयोग ने माना कि ग्राहक को समय पर सूचना न देना और खाते के संचालन में पारदर्शिता न बरतना बैंक की जिम्मेदारी में चूक है।