नई दिल्ली : देश की अर्थव्यवस्था दमदार ढंग से आगे बढ़ रही है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट और अल-निनो सहित कुछ बाहरी चुनौतियों से अनिश्चितता बनी हुई है। कच्चे तेल और फर्टिलाइजर की ऊंची कीमतों के चलते वित्तीय बोझ बढ़ रहा है। सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को यह बात कही। हालांकि उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे को GDP के 4.3% पर रखने के बजटीय लक्ष्य पर इसके चलते कोई आंच आती नहीं दिख रही है और सरकार की अतिरिक्त उधारी लेने की भी अभी कोई योजना भी नहीं है।
पहले ही उठाए कदम : सूत्रों ने कहा कि इस वित्त वर्ष का बजट पेश किए जाने के पहले से अनिश्चितताएं दिखने लगी थीं, जिसे देखते हुए बजट में पहले ही कदम उठा लिए गए थे। बजट में 1 लाख करोड़ रुपये के इकनॉमिक स्टेबिलाइजेशन फंड की व्यवस्था की गई थी। सू्त्रों ने कहा कि अभी विमानन क्षेत्र के लिए 10000 करोड़ रुपये के जिस प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड की घोषणा की गई, इस तरह के कदम जरूरत पड़ने पर आगे भी बजट वाले उसी फंड के जरिए उठाए जा सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि इसके चलते अभी अतिरिक्त उधारी की जरूरत नहीं दिख रही।
सूत्रों ने कहा कि अच्छे जीएसटी कलेक्शन, प्राइवेट इनवेस्टमेंट में तेजी और दमदार कंजम्पशन के चलते अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है और जनवरी-मार्च तिमाही में जो ग्रोथ दिखी थी, वह मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था से जुड़े पहलुओं की समीक्षा अप्रैल-जून तिमाही के आर्थिक आंकड़े आने और मॉनसूनी बारिश पर अल-निनो का असर ज्यादा साफ होने के बाद जुलाई में की जाएगी।

