n तरुण तायल, गुड़गांव
गुड़गांव-फरीदाबाद रोड पर इन दिनों विभागीय लापरवाही का दंश झेल रही है। दरअसल, इस सड़क को मरम्मत के नाम पर उखाड़ तो दिया गया, लेकिन तारकोल और अन्य सामग्री उपलब्ध न होने की बात कहकर इसे वैसा ही छोड़ दिया गया है। जिसका खामियाजा वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें टोल टैक्स देने के बावजूद टूटी, उखड़ी और धूल से भरी सड़क गुजरना पड़ रहा है। पीडब्ल्यूडी के अधीन इस सड़क पर मरम्मत के नाम पर खेले गए इस खेल ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।
हाल ही में टोल का टेंडर करीब 40 दिन के लिए बढ़ाया गया है। इसके बाद टोल संचालन कंपनी ने विभागीय आदेशों का हवाला देते हुए सड़क के कई हिस्सों को जगह-जगह से उखाड़ दिया। सड़क उखाड़ने के बाद उसे दुरुस्त करने का काम तारकोल समेत अन्य जरूरी संसाधन न होने की बात कहते हुए ठप हो गया। इस रोड से रोजाना करीब 10 हजार वाहन गुजरते हैं। सड़क उखड़ी होने से लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि अगर सड़क की मरम्मत के लिए आवश्यक सामग्री और संसाधन उपलब्ध नहीं थे तो सड़क को उखाड़ने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? सिर्फ यह दिखाने को कि काम शुरू हो गया है, ऐसा करके लोगों की परेशानी बढ़ा दी गई है।
युद्ध के कारण नहीं मिल पा रहा तारकोल: विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के चलते तारकोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिसके कारण मरम्मत कार्य अटक गया है। यह तर्क भी सवालों के घेरे में है। युद्ध और आपूर्ति संकट कोई एक-दो दिन पुरानी बात नहीं है। पिछले करीब चार महीनों से अंतरराष्ट्रीय हालात चर्चा में हैं। ऐसे में क्या विभाग और टोल कंपनी को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि तारकोल मिलने में दिक्कत थी तो सड़क को उखाड़ने का निर्णय किस आधार पर लिया गया?

