Sunil.Pandey2
@Timesofindia.com
n ग्रेनो : हाईराइज इमारतों में प्लास्टर गिरने की घटनाएं जानलेवा साबित हो रही हैं। पॉलिसी लागू होने के तीन साल बाद भी किसी सोसायटी का स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं हुआ। स्ट्रक्चरल ऑडिट के आदेश भी कागजों में सिमट कर रह गए। हादसे के बाद अथॉरिटी की ओर से जवाब मांगा जाता है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई तक मामला नहीं पहुंच पाता है। इसका खामियाजा निवासियों को उठाना पड़ता है।
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी एरिया में 218 आवासीय सोसायटी हैं। इन बहुमंजिला इमारतों की क्वालिटी पर सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अरिहंत अंबर सोसाइटी में प्लास्टर गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद सोसाइटी प्रबंधन से स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के लिए अथॉरिटी की ओर से नोटिस जारी किया गया है। पिछले साल 20 मार्च को ग्रेनो वेस्ट की अजनारा होम्स सोसाइटी के स्ट्रक्चरल ऑडिट के आदेश हुए थे। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने तीन माह में रिपोर्ट मांगी थी। ऐसे ही कई और सोसाइटियों से स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के आदेश हुए थे, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। सुपरटेक इको विलेज-1 के निवासी मनीष कुमार ने कहा कि स्ट्रक्चरल ऑडिट होना जरूरी है। इससे पता चल जाएगा कि इमारत कहां पर कमजोर है। उसे दुरुस्त किया जा सकता है। ताकि हादसे से बचा जा सके।
बिल्डर या एओए
को उठाना होगा खर्च
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने बहुमंजिला इमारतों के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट पॉलिसी को 1 अप्रैल 2023 से लागू कर दिया है। इसके बाद से बिल्डरों के लिए कंप्लीशन सर्टिफिकेट पाने के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य किया गया है। नियमों के मुताबिक, प्रॉजेक्ट पूरा होने के शुरुआती 5 वर्ष तक ऑडिट और किसी भी प्रकार की मरम्मत को ठीक कराने का खर्च बिल्डर स्वयं उठाएगा। इसके बाद ऑडिट और मरम्मत का खर्च संबंधित अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को उठाना होगा। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने अपने पैनल में आईआईटी समेत आठ संस्थाओं को शामिल किया है। इनसे ऑडिट करवाया जा सकता है।

