पट्टी मत पढ़ाओ

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पट्टी मत पढ़ाओ
भाषा की खूबसूरती यह है कि एक ही शब्द अलग-अलग संदर्भों में अलग-अलग अर्थ देता है। हिंदी का ऐसा ही एक शब्द है पट्टी। आमतौर पर पट्टी का अर्थ घाव या चोट पर बांधा जाने वाला कपड़े का फीतानुमा टुकड़ा होता है, जो उपचार और सुरक्षा का काम करता है। जब हम हिंदी पट्टी कहते हैं, तो इसका आशय उन क्षेत्रों से होता है जहां हिंदी प्रमुख रूप से बोली, पढ़ी और लिखी जाती है। इसी प्रकार किसी को कोई बात अपनी मतलब से समझाता है, तो जवाब में लोग कहते हैं- पट्टी मत पढ़ाओ। कई बार यह मुहावरा नकारात्मक अर्थ में भी प्रयोग होता है, जब किसी व्यक्ति को किसी के विरुद्ध भड़काया या बहकाया जाता है। गुजराती में पट्टी का अर्थ लकड़ी की तख्ती या स्लेट होता है, जिस पर बच्चे पहले लिखना सीखते थे। दक्षिण भारत की कुछ भाषाओं में पट्टी जैसे शब्द किसी पट्टे, बेल्ट या भूमि के हिस्से के अर्थ में इस्तेमाल होते हैं। तिल, दाल को चाशनी में पागकर बनाई जाने वाली एक मिठाई को भी पट्टी कहते हैं। सिर के बालों को संवारने के लिए मांग के दोनों ओर बालों को कंघी से बैठाने को पट्टी पाड़ना कहते हैं।