सहेजे गए यहां विरासत के करोड़ों दस्तावेज

नवभारतटाइम्स.कॉम
millions of mumbais heritage documents preserved in maharashtra state archives
जब 365 साल पहले पुर्तगालियों ने अंग्रेजों को मुंबई सौंपी होगी, तब किसी ने सोचा नहीं होगा कि सात द्वीपों वाला यह टापू दुनिया का सिरमौर होगा। 23 जून, 1661 को इंग्लैंड के किंग चार्ल्स द्वितीय और पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ब्रागांज़ा के विवाह पर अंग्रेजों को मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) गिफ्ट की गई। 1668 में किंग चार्ल्स ने इसे सालाना 10 पाउंड किराए पर ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंपा, यहीं से मुंबई की नींव पड़ी। 18वीं-19वीं शताब्दी में भूमि सुधारों के जरिए सातों द्वीपों को जोड़कर इसे एक शहर बनाया गया। 24 जून, 1826 में ‘बॉम्बे कूरियर’ छपा, तब तक मुंबई देश का वाणिज्यिक केंद्र बन चुका था। 1661 और 1668 में मुंबई के हस्तांतरण से जुड़े मूल दस्तावेज ‘सर कावासजी जहांगीर रेडिमनी बिल्डिंग’ स्थित महाराष्ट्र राज्य अभिलेखागार में उपलब्ध हैं। दक्षिण मुंबई के फोर्ट एरिया में जहांगीर आर्ट गैलरी के सामने इसी ऐतिहासिक इमारत में एलफिंस्टन कॉलेज भी है। 18.5 करोड़ दस्तावेज । महाराष्ट्र राज्य अभिलेखागार निदेशालय के डायरेक्टर सुजीतकुमार के.उगले बताते हैं कि 1821 में विकसित यह अभिलेखागार 1889 में यहां आया। करीब 18.5 करोड़ दस्तावेज हैं, जिनमें 10.5 करोड़ मुंबई में, जबकि अन्य पुणे, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर में हैं। इनमें 12 करोड़ डॉक्यूमेंट्स माइक्रो फिल्म में सहेजे गए हैं। यहां सूरत फैक्ट्री डायरी (1760), देश की पहली ट्रेन (1853), घोड़ागाड़ी सेवा (1874), पहली ट्राम (1907) और बस सेवा (1926) से जुड़े दस्तावेज, मैप, फोटोज आदि मौजूद हैं। औरंगजेब, छत्रपति शिवाजी महाराज, स्वतंत्रता आंदोलन और गल्फ कंट्रीज के ब्रिटिश दस्तावेज भी यहां उपलब्ध हैं। दस्तावेज बचाने की चुनौती । 1895 के पैंडेमिक ऐक्ट (वैश्विक महामारी प्लेग) के दस्तावेज भी जस के तस हैं। कोविडकाल में प्रचलित ‘क्वॉरंटीन’ शब्द तभी का है। 1896 में प्लेग से निपटने के लिए बाहर से आने वालों को वैसे ही क्वॉरंटीन कर उनसे सोशल डिस्टेंस रखा गया था, जैसे कोविडकाल में देश-दुनिया ने किया। बरसों से यहां सेवारत संतोष धनावडे की मानें, तो इन दस्तावेजों को बचाए रखने की जद्दोजहद भी कम नहीं हैं। समय-समय पर साफ-सफाई, पेपर-इंक फ्रेंडली केमिकल का छिड़काव, टेंपरेचर के हिसाब से रख-रखाव बड़ी चुनौती है। उगले बताते हैं कि कोविड काल में भी हमने इन्हें जतन से सहेजा, अन्यथा मॉनसून के दौरान इन दस्तावेजों के नष्ट हो जाने का खतरा था। जनता से जुड़ने की तैयारी । अभिलेखागार निदेशालय को बांद्रा ईस्ट में बांद्रा कॉलनी मेट्रो स्टेशन के पास दो एकड़ भूखंड मिला है, ताकि दस्तावेज संरक्षित रखे जा सकें। यहां स्टोरेज, कंजर्वेशन, माइक्रो फिल्मिंग, रिसर्च रूम, प्रदर्शनी हॉल, ऑडिटोरियम, लेक्चर्स रूम, मोडी लिपि कोर्स आदि होंगे। इसके निर्माण और शिफ्टिंग में दो साल लगेंगे। फंडिंग की दिक्कत नहीं है, बल्कि यह करीब 80% बढ़ा है, जिससे स्पष्ट है कि हमारी सरकार धरोहर से जुड़ी सामग्री संजोने को लेकर संजीदा है।