कौन भरेगा पैसा? : RBI के निर्देशों के मुताबिक, अनधिकृत डिजिटल ट्रांजेक्शन होने पर मुआवजे की रकम मिलकर भरी जाएगी। इसमें 65% हिस्सा RBI देगा। 10% हिस्सा उस बैंक का होगा जिसमें पीड़ित का खाता है। 10% हिस्सा उस बैंक का होगा जिसमें फ्रॉड का पैसा गया है (बेनेफिशियरी बैंक)।पहली बार RBI ने सीमा पार होने वाले फ्रॉड के लिए भी मुआवजे का नियम बनाया है। अगर किसी ऐसे फ्रॉड में पैसा विदेश गया है जहां कोई भारतीय बैंक शामिल नहीं है, तो मुआवजे का 65% हिस्सा RBI और बाकी 35% हिस्सा ग्राहक का बैंक देगा।
आपको क्या करना होगा? : फ्रॉड होने के 5 दिनों के भीतर नैशनल साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत करनी होगी।
अपने बैंक को भी जानकारी देनी होगी।
ग्राहक की अर्जी मिलने के 5 दिनों के भीतर बैंक को मुआवजा देना होगा।
क्रेडिट कार्ड केस में क्या होगा? : क्रेडिट कार्ड फ्रॉड के मामलों में RBI ने शैडो रिवर्सल की सुविधा शुरू की है। इसका मतलब यह है कि जैसे ही ग्राहक फ्रॉड की रिपोर्ट करेगा, बैंक को 5 दिनों के भीतर वह रकम ग्राहक के खाते में (प्रोविजनल क्रेडिट के तौर पर) डालनी होगी, भले ही जांच पूरी न हुई हो।
जांच में कितना समय? : देश के भीतर होने वाले फ्रॉड की जांच 45 दिनों में और अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड की जांच 60 दिनों के भीतर पूरी कर सुलझानी होगी। साथ ही, बैंकों को इन शिकायतों की रिपोर्ट समय-समय पर अपने बोर्ड को देनी होगी।





