65% आवासीय भूखंडों पर कमर्शल एक्टिविटी, जिम्मेदारों का नहीं है ध्यान

नवभारतटाइम्स.कॉम
65 residential plots in ghaziabad under illegal commercial activity administration unaware
n NBT रिपोर्ट, गाजियाबाद : लखनऊ अग्निकांड जिस इमारत में हुआ, वह असल में आवासीय (रेजिडेंशियल) थी, लेकिन वहां कमर्शल एक्टिविटी चलाई जा रही थी। जीडीए के एक अनुमान के अनुसार, गाजियाबाद में भी 65 फीसदी आवासीय भूखंडों पर कमर्शल एक्टिविटी चल रही हैं। लखनऊ जैसे बड़े हादसे के 4 दिन बाद भी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन का इस दिशा में ठोस कदम न उठाना, हैरान करने वाला है।

गाजियाबाद के पॉश इलाकों से लेकर आम कॉलोनियों तक रिहायशी मकानों में दुकान, शोरूम और ऑफिस चल रहे हैं। लोगों ने बिल्डिंग्स के सेटबैक (खुली छोड़ी जाने वाली जगह) को कवर कर अवैध निर्माण कर लिया है। इससे सबसे बड़ा खतरा यदि एक बिल्डिंग में आग लगती है, तो वह आसानी से दूसरी को भी अपनी चपेट में ले लेगी। ये अवैध निर्माण बिना नक्शे के किए जाते हैं, इसलिए यहां न तो इमरजेंसी एग्जिट हैं और ना ही कोई सुरक्षा मानक।
क्या होता है सेटबैक

नियमों के मुताबिक, जब भी किसी कॉलोनी या प्लॉट पर मकान बनाया जाता है, तो बिल्डिंग के आगे, पीछे और दोनों तरफ कुछ जगह खाली छोड़नी अनिवार्य होती है। इसी जगह को सेटबैक कहा जाता है। यह जगह इसलिए छोड़ी जाती है ताकि बिल्डिंग में हवा और रोशनी आती रहे। सबसे जरूरी आपातकाल में लोग वहां से सुरक्षित निकल सकें और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आसानी से मूवमेंट कर सकें।

फटाफट कनेक्शन दे रहा बिजली विभाग

इस खेल में बिजली विभाग की भूमिका अनोखी है। आवासीय भूखडों पर आसानी से कमर्शल बिजली कनेक्शन मंजूर किए जाते हैं। पैसे और रसूख के दम पर रिहायशी मकानों को हैवी लोड के कमर्शल कनेक्शन मिल जाते हैं। रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ाने के चक्कर में बिजली विभाग ये भूल गया कि एक आवासीय क्षेत्र में कमर्शल लोड बढ़ने से ट्रांसफाॅर्मर फुंकने और शॉर्ट सर्किट से बड़ी आग लगने का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।