च्युइंग गम के बहाने चर्चा

Contributed byशैलेंद्र श्रीवास्तव|नवभारतटाइम्स.कॉम
chewing gum spitting problem where and how
उस दिन टीवी पत्रकारों के एक समारोह में हमें जल्दी पहुंचना था। मुंबई की व्यस्त सड़कों पर हम मलाड से सिद्धिविनायक मंदिर की ओर सरपट बढ़े जा रहे थे। हमारे साथ कार में आगे की सीट पर आनंद मिश्र बैठे थे। उनका बेटा देवांश गाड़ी चला रहा था। मेरे बगल में सुनील सिंह थे। उन्होंने अचानक कहा, ' च्युइंग गम थूक दो!'

ठीक इसी वक्त मेरे ध्यान में आया कि कार में एसी की ठंडक के बीच मेंथॉल की सुगंध देवांश के मुंह से प्रवाहित हो रही है। उसने हंसते हुए जवाब दिया, 'थोड़ा रुकिए अंकल, अभी कहां रोकें?' उस वक्त हमारी कार हाईवे पर गाड़ियों की कतार में तेज गति से दौड़ रही थी। उसकी समस्या थी कि वह च्युइंग गम थूके, तो कहां? बेहतर था कि वह मुंह में रोके रखे! अब सुनील ने कहा कि जरूरत पड़ने पर तो थूकना ही पड़ता है। देवांश ने मेरी ओर मुड़कर राय मांगी, 'अभी थूकूं या बाद में?' उसका प्रश्न सही था, क्योंकि उस समय गाड़ी को किनारे करके रुकना उचित नहीं था। हमारी कार गाड़ियों की दौड़ती भीड़ में शामिल थी। आनंद कहने लगे, 'आमतौर पर जब कोई फिक्र की बात नहीं होती है, तब कोई भी कोना चल जाता है। अपने देश में वैसे भी यात्रा के दौरान खिड़की से पिचकारी छोड़ना सामान्य प्रैक्टिस है। हालांकि यह ठीक नहीं।'
खैर, थूकने की प्रक्रिया में च्युइंग गम को भी ठिकाने लगाना था। देवांश च्युइंग गम चबाने का मजा ले रहा था। लेकिन, परेशानी हम अगल-बगल वालों की थी। वैसे च्युइंग गम अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर था। उसे कहीं तो थूकना था। लेकिन, वैसे नहीं जैसे हम कई बार सड़क, दीवार, कुर्सी के नीचे या किसी के जूते के तलवे पर चिपके च्युइंग गम को देखते हैं। हम नहीं चाहते थे कि किसी के जूते में च्युइंग गम चिपक जाए और वह इसे छुड़ाने के लिए संघर्ष करे! मैंने ऐसी स्थिति झेली है। उस समय मजबूरन पहले जूते को जमीन पर रगड़ना, फिर डंडी से कुरेदना और अंततः इंटरनेट पर 'च्युइंग गम कैसे छुड़ाएं' खोना पड़ा था।

मैने देवांश से जानना चाहा कि वह च्युइंग गम खाता ही क्यों है? उसके जवाब में भी अच्छा तर्क था कि च्युइंग गम कुछ स्थितियों में दांतों और जबड़ों की कसरत के लिए उपयोगी है और तनाव कम करने में भी मदद करता है। मैंने कहा, 'इसका अर्थ यह नहीं कि कहीं भी जबड़ों की कसरत शुरू कर दी जाए। आखिर मुंह बातचीत और मुस्कुराने के लिए भी तो है।' कुछ देर बाद वह खुशबू वहां से गायब थी। देवांश ने च्युइंग गम टिश्यू पेपर में लपेटकर फेंकने के लिए रख दिया था। उसे अपनी जिम्मेदारी का अहसास हो गया था। 'सॉरी' वह पहले ही कह चुका था।