दुनिया के लिए चेतावनी

नवभारतटाइम्स.कॉम
europes severe heatwave a warning to the world growing threat of climate change
यूरोप इस समय अपने इतिहास की सबसे भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। लगभग दो-तिहाई आबादी हीटवेव की चपेट में है। पेरिस में तो पिछले दिनों अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। कई जगह सार्वजनिक समारोह रद्द करने पड़े हैं, स्कूल बंद हैं और पार्क रातभर खुले रखे जा रहे। यूरोप की यह स्थिति असल में पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है।

बदतर होती स्थिति । यूरोपीय देश अब लगातार असामान्य गर्मी का सामना कर रहे हैं। 1976 और 2003 का जिक्र खासतौर पर किया जाता है। 2003 में हीटवेव के कारण करीब 70 हजार मौतें हुई थीं। लेकिन, वैज्ञानिकों की चिंता है कि तब जो अपवाद था, वह अब सामान्य बनता जा रहा है। हाल के बरसों में गर्मी ने लगातार रेकॉर्ड तोड़े हैं। इसी बार ब्रिटेन में 36.1 और 36.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ, जून में अब तक का सबसे अधिक। जर्मनी, बेल्जियम और नीदरलैंड में भी पारा 30 डिग्री के ऊपर है।
सभी पर संकट । क्लाइमेट चेंज का सामना पूरी दुनिया कर रही, पर यूरोप पर असर ज्यादा हो रहा है। 1990 से लेकर अब तक इस महाद्वीप में हर दशक में औसत तापमान 0.56 डिग्री बढ़ा है, बाकी धरती के औसत से दोगुना। मुख्य कारण है आर्कटिक की बर्फ का पिघलना और ग्रीनहाउस गैसें। वहां मौसम का बिगड़ना इस बात का सबूत है कि पर्यावरणीय असंतुलन एक इलाके तक सीमित नहीं है।

प्रयास धीमे । पेरिस जलवायु समझौते को इस मामले में बड़ी कामयाबी माना जाता है। इसके लागू होने के बाद से फॉसिल फ्यूल्स का उपयोग कम करने के प्रति प्रयास तेज हुए हैं। कार्बन उत्सर्जन में बढ़ोत्तरी की दर घटी है। साथ ही, 62 देशों ने कोयले का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म करने का वादा किया है। लेकिन, जलवायु परिवर्तन जिस रफ्तार से हो रहा है, उसे देखते हुए प्रयास धीमे हैं।

लापरवाह रवैया । दुनिया की दो सबसे बड़ी इकॉनमी अमेरिका और चीन अभी भी गंभीर नहीं हैं। पेरिस समझौते का चीन हिस्सा तो है, पर उसने तय लक्ष्य से कम का वादा किया है। इसी तरह, डॉनल्ड ट्रंप ने तो अमेरिका को इस समझौते से ही बाहर निकाल लिया, जिससे कार्बन इमिशन के खिलाफ वैश्विक प्रयास कमजोर हुए हैं। उनकी नीतियां भी फॉसिल्स फ्यूल को बढ़ावा देने वाली हैं। इससे बात बनेगी नहीं। सरकारों को प्राथमिकता और नीतियों में पर्यावरण को सबसे ऊपर रखना होगा।