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मुंबई और आसपास के सैन्य इलाकों में सर्व धर्म स्थल हैं। यहां सभी धर्मों के लोग एक साथ प्रार्थना कर सकते हैं। यह भारतीय सेना की विविधता में एकता की भावना को दर्शाता है। ये स्थल सैनिकों को मानसिक शांति और देश सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।

mumbai gets its first all faiths temple a symbol of unity in diversity

जब पूरी दुनिया वैमनस्यता का तंबू ताने मनुष्यता का क्षरण कर रही है, कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहां वसुधैव कुटुंबकम को साधा जा रहा है। इस बार मुंबई की ऐसी ही जगहों से साक्षात्कार का मौका मिला, जहां सर्व धर्म समभाव को प्रमुखता दी जाती है। जी हां, मुंबई और आसपास के सैन्य परिक्षेत्र में ऐसे कई ‘सर्व धर्म स्थल’ हैं, जहां सभी धर्मों के लोग एकसाथ प्रार्थना कर सकते हैं। इनके दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, चाहे वह आम सैनिक हों या आम आदमी। हालांकि कुछ ‘सर्व धर्म स्थल’ सुरक्षा कारणों से रिस्ट्रिक्टेड हैं। यहां अनुमति लेकर ही जा सकते हैं। लेकिन अधिकांश स्थल ऐसी जगहों पर हैं, जहां कोई भी जा सकता है। भारतीय सेना में ‘सर्व धर्म स्थल’ का कॉन्सेप्ट सेना की स्थापना के समय से ही परोक्ष रूप से मौजूद रहा है, जो ‘विविधता में एकता’ को बढ़ावा देता है। ये साझा प्रार्थना स्थल होते हैं, जहां सभी धर्मों के सैनिक (हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई) एकसाथ पूजा या इबादत करते हैं। यह कॉन्सेप्ट सैनिकों को मानसिक शांति प्रदान करने और देश सेवा के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

महात्मा गांधी के सिद्धांत से प्रेरित । फेंस के पीआरओ कैप्टन मेहुल कार्णिक बताते हैं कि सर्व धर्म स्थलों का मुख्य उद्देश्य सैनिकों के बीच आपसी भाईचारा , सम्मान और एकता को बढ़ावा देना है, विशेषकर कठिन इलाकों या युद्धक्षेत्रों में ये उन्हें एक-दूसरे से जोड़े रखते हैं। ये ‘सर्व धर्म समभाव’ के सिद्धांत पर आधारित हैं, जिसकी प्रेरणा महात्मा गांधी से मिली है। दुश्मन की गोली धर्म देखकर नहीं आती, इसलिए हमारी सेना में सभी समान हैं और सभी को समभाव से देखा जाता है।

दुर्गम क्षेत्रों में भी मौजूद । इन स्थलों के अस्तित्व से जुड़ी बात पर सूबेदार नीलेंद्र त्रिपाठी बताते हैं कि यह अवधारणा ब्रिटिश काल से ही भारतीय सेना की धर्मनिरपेक्ष परंपरा का हिस्सा रही है, जिसे बाद में और अधिक सुदृढ़ किया गया। मुंबई, महाराष्ट्र या अन्य राज्यों तक ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के दुर्गम सैन्य स्थलों जैसे अरुणाचल प्रदेश के मिगिंग ट्रांजिट कैंप और बाल्टाल (अमरनाथ यात्रा) आदि में भी ‘सर्व धर्म स्थल’ स्थापित किए गए हैं। हालांकि, रांची-मैक्लुस्कीगंज रोड पर दुल्ली में स्थित ‘सर्व धर्म स्थल’ सबसे प्राचीन माना जाता है।

मुंबई का पहला स्थल । मुंबई में डिफेंस से संबंधित पहला ‘सर्व धर्म स्थल’ नेवी नगर, कोलाबा में स्थापित किया गया था, जो मुख्यत: भारतीय नौसेना के प्रशासनिक नियंत्रण और प्रबंधन में है। यह क्षेत्र 19वीं सदी के अंत से ही छावनी परिसर में विकसित होने लगा था, जहां तीनों सेनाओं के कार्मिकों की सुविधा का ध्यान रखा गया। यह विक्टोरियन गोथिक रिवाइवल और इंडो-सारसेनिक शैली के मिश्रण से बना बेहद आकर्षक स्थल है। यहां पहुंचकर कोई भी सहज ही स्वयं से सापेक्ष हो जाए।