इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिग बटुकों से कथित यौन शोषण मामले में आरोपी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की सशर्त अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने बुधवार को यह आदेश सुनाया। इससे पहले कोर्ट ने 27 फरवरी को दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए आदेश सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने कहा है कि यदि आवेदकों को उपरोक्त मामले में गिरफ्तार किया जाता है, तो व्यक्तिगत मुचलके और 50 हजार रुपये की दो प्रतिभूतियों पर रिहा किया जाएगा। कोर्ट ने आवेदक, शिकायतकर्ता और पीड़ितों को निर्देश दिया है कि वह मीडिया में इस केस को लेकर बयान न दें। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के खिलाफ झूंसी थाने में पॉक्सो ऐक्ट के तहत केस दर्ज है।
आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश के आदेश के क्रम में यह एफआइआर लिखी गई है। माघ मेला और महाकुंभ में नाबालिगों के साथ कुकर्म का आरोप है। कोर्ट को पीड़ितों के तथ्य और बयानों में विसंगतियां मिलीं। बचाव पक्ष ने पीड़ितों को कथित घटना के समय (जनवरी 2025 से फरवरी 2026) के बीच वयस्क बताया। यह भी कहा गया कि पीड़ितों का संबंध स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम से नहीं है। वह हरदोई जिले के संस्कृत विद्यालय के छात्र हैं।



