n नई दिल्ली: राजधानी में गर्भनिरोधक के पारंपरिक तरीकों के बीच अब ' सब-डर्मल इंप्लांट ' तेजी से अपनी जगह बना रहा है। दिल्ली आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े बता रहे हैं कि महज दो साल के अंदर इस आधुनिक तरीके को अपनाने वालों की संख्या में तीन गुना से अधिक का उछाल आया है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसका 'लॉन्ग टर्म प्रोटेक्शन' है। एक बार इंप्लांट लगवाने के बाद महिलाएं पांच से छह साल तक अनचाहे गर्भ से बेफिक्र हो जाती हैं। जहां 2023-24 में इसकी शुरुआत मात्र 558 मामलों से हुई थी, वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 1810 तक पहुंच गया है, जो बदलती पसंद और आधुनिक मेडिकल सुविधाओं के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
कब हुई इसकी शुरुआत? : दरअसल 'सब-डर्मल इंप्लांट' के लिए इंजेक्शन Medroxyprogesterone Acetate (MPA) लगाया जाता है। इसके इस्तेमाल की शुरुआत 2017-18 में हुई थी, यह एक हार्मोनल गर्भनिरोधक इंजेक्शन है, जो मांसपेशी में लगाया जाता है। यह शरीर में प्रोजेस्टिन हार्मोन देता है, जिससे अंडा निकलना बंद हो जाता है और गर्भाशय का म्यूकस गाढ़ा होने लगता है, जिससे प्रेग्नेंसी नहीं होती है। लेकिन इसमें बड़ी दिक्कत यह है लगभग तीन महीने में यह इंजेक्शन लेना पड़ता है।
इस बारे में महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शीतल अग्रवाल का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 5 से 6 साल का लंबा प्रोटेक्शन देता है।



