डिजिटल अरेस्ट कर दंपती से ठगे 1.89 करोड़, चार अरेस्ट

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धारूहेड़ा के एक दंपति से लगभग डेढ़ माह तक डिजिटल अरेस्ट कर एक करोड़ 89 लाख रुपये ठगे गए। सीबीआई इंस्पेक्टर बनकर मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर यह ठगी की गई। तंग आकर पीड़ित ने आत्महत्या का मन बना लिया था। पुलिस ने राजस्थान और मध्यप्रदेश से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

digital arrest couple duped of 189 crore scammers posing as cbi inspectors flee

n NBT न्यूज, रेवाड़ी

धारूहेड़ा के सेक्टर-6 निवासी एक दंपति को लगभग डेढ़ माह तक डिजिटल अरेस्ट कर उनसे एक करोड़ 89 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी राजस्थान के जिला करौली के रौनक जाटव व पंकज सैनी व मध्यप्रदेश के जिला भिंड के मानवेंद्र कौरव व दतिया के मनविंद्र हैं। आरोपियों ने सीबीआई इंस्पेक्टर बनकर मनी लाॅन्ड्रिंग के केस में फंसाने का डर दिखाया और पैसे ट्रांसफर करा लिए। तंग आकर पीड़ित ने स्यूसाइड रने का मन बना लिया था, लेकिन इसी दौरान उनके एक रिश्तेदार आ गए और ठगी का मामला सामने आ गया। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

साइबर थाने के जांचकर्ता ने बताया कि 22 अप्रैल को धारूहेड़ा के सेक्टर-6 के पूर्व सैनिक राजपाल सिंह ने शिकायत दी थी कि 27 व 28 फरवरी को उसके फोन पर किसी नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को ट्राई का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उसकी सिम बंद होने वाली है। उसकी आईडी से गलत ढंग से सिम खरीदी गई है, जिससे उसके खिलाफ मुबंई में एफआईआर दर्ज है। वहीं उसके नंबर से न्यूड फोटो और विडियो भेजे जा रहे हैं। राजपाल सिंह ने बताया कि इसके बाद एक अन्य नंबर से फोन आया और कॉलर ने खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर बताने हुए कहा कि उसे डिजिटल अरेस्ट किया गया है। अगर वह बचना चाहता है, तो उसके बताए गए खाता नंबरों पर पैसे ट्रांसफर करने होंगे। शुरू में उसने कुछ रकम ट्रांसफर की, तो उसे मनी लाॅन्ड्रिंग के केस में फंसाने की धमकी देते हुए और पैसे ट्रांसफर करा लिए गए। उसे और उसकी पत्नी को घर से बाहर नहीं निकलने और किसी से संपर्क नहीं करने को कहा गया। उसे बार-बार डराकर 3 मार्च से 20 अप्रैल तक कुल एक करोड़ 89 लाख 28 हजार रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए। यह राशि पीड़ित ने अपनी प्रॉपर्टी व जूलरी बेचकर जुटाई थी। उसके फोन पर एक एप डाउनलोड कराने के बाद उन पर निगरानी रखी गई, जिससे वह और उसकी पत्नी कमरे में बंधक बने रहे। राजपाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मोबाइल फोन पर एप डाउनलोड कराने के बाद उसे और उसकी पत्नी को ऑनलाइन पुलिसकर्मी, हथियार, कोर्ट, जज और फर्जी रसीद दिखाए गए। फर्जी जज ने प्रॉपटी की वैरिफिकेशन करते हुए उसे बेचने और 70 प्रतिशत राशि सरकारी खजाने में जमा कराने को कहा। पुलिस ने चारों अारोपियों रौनक जाटव, पंकज सैनी, मानवेंद्र कौरव व मनविंद्र को गिरफ्तार कर लिया। रौनक के खाते में ठगी के 5 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर हुए थे, जबकि पंकज ने खाता उपलब्ध कराने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। मानविंद्र और मनविंद्र ने साइबर ठगी में प्रयोग किए गए एक अन्य खाते को कमिशन बेस पर उपलब्ध कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।