'फटी जेब से गिरते रहे बच्चों के ख्वाब, प्रशासन के वादों में खोजता हूं हिसाब'

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नोएडा के श्रमिक 7 मई का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि बढ़ा हुआ वेतन उनकी आर्थिक तंगी दूर करेगा। सीमित आय और बढ़ती महंगाई के बीच उनका जीवन संघर्षपूर्ण है। प्रशासन की कोशिशें जारी हैं। श्रमिकों को राशन और स्वास्थ्य योजनाओं से कुछ राहत मिली है, पर यह पर्याप्त नहीं है।

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n NBT न्यूज, नोएडा-ग्रेटर नोएडा

महीने की 7 तारीख पास आते ही नोएडा के एक सेक्टर में रहने वाले संतोष की धड़कनें तेज होने लगती हैं। चेहरे पर वेतन आने की उम्मीद तो है, लेकिन आंखों में वही पुराना डर कि क्या इस बार बच्चों की स्कूल फीस और कमरे का किराया चुकाने के बाद थाली में दाल गाढ़ी मिल पाएगी? बीते दिनों नोएडा की सड़कों पर उतरा श्रमिकों का हुजूम महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस दबी हुई चीख का भी नतीजा था जो 10-15 हजार की सीमित आय और आसमान छूती महंगाई के बीच घुट रही है। प्रशासन की कोशिशों के बीच अब सबकी निगाहें 7 मई पर टिकी हैं, जहां बढ़ा हुआ वेतन शायद उनके संघर्षपूर्ण जीवन को थोड़ी ऑक्सीजन दे सके। उनका कहना है कि हालांकि कंपनियों ने इस तरह की कोई घोषणा नहीं की है, जबकि प्रशासन ने बढ़ा हुआ वेतन आने की बात कही है। कई श्रमिकों का कहना है कि राशन, स्वास्थ्य योजनाएं और अन्य सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं आंशिक राहत जरूर दे रही हैं, लेकिन ये उनकी कुल जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।