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ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका नाकाबंदी से दबाव बना रहा है तो ईरान जहाजों की आवाजाही रोक रहा है। इससे तेल और गैस के दाम बढ़ रहे हैं। यह स्थिति दुनिया भर के लिए चिंता का विषय है। दोनों देश अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।

iran america tension global pressure and oil price rise due to strait of hormuz blockade

अमेरिका होमुर्ज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी कर दबाव बनाना चाहता है, तो ईरान होमुर्ज से जहाजों की आवाजाही रोककर दुनिया पर दबाव बना रहा है। इससे तेल और गैस के दाम बढ़ रहे हैं और यही बढ़ोतरी अमेरिका को दबाव में लाती है। दोनों देश अपनी मांगों को पूरा करवाने खातिर चालें चल रहे हैं। यूं समझ लीजिए कि यहां कूटनीति के बजाय दबाव की राजनीति पूरी तरह हावी है। अब यह तनाव दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया इसकी कीमत चुका रही है। दोनों देशों की रणनीति है “हम जीत गए”। अमेरिका दबाव बनाकर ‘अनुकूल समझौता’ चाहता है। अब वार्ता का नतीजा समाधान के बजाय “जीत का नैरेटिव” बन जाता है, तो समझौते की संभावनाएं स्वतः सीमित हो जाती हैं। दबाव की राजनीति अल्पकालिक जीत दिला सकती है, लेकिन स्थायी शांति नहीं।

-अंजनी कुमार दाधीच, ईमेल से

 भाषा विवाद से नुकसान संभव

मुंबई भारत का एकमात्र ऐसा महानगर है जिसकी तुलना लंदन, टोक्यो, शिकागो और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक शहरों से की जा सकती है। यहां राजस्थान, गुजरात, बंगाल, तमिलनाडु सहित लगभग सभी राज्यों के नागरिक रहते हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका, रूस, जापान और जर्मनी जैसे देशों के लोग भी यहां निवास करते हैं, जिससे इस शहर की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। मराठी भाषा को लेकर चल रहा विवाद मुंबई की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। भाषा के सम्मान के साथ-साथ संतुलित और दूरदर्शी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि मुंबई की वैश्विक पहचान और प्रतिष्ठा अक्षुण्ण बनी रहे।

- एमसी जैन, ईमेल से