EDC में निवेशकों को वित्तीय राहत

नवभारतटाइम्स.कॉम

सरकार ने ईडीसी नियमों में बड़ा बदलाव किया है। एग्रीकल्चर जोन की जमीन शहरी होने पर निर्मित हिस्से पर ईडीसी नहीं लगेगा। खाली हिस्से पर नियम लागू होंगे। करीब 70% क्षेत्र में जमीन उपयोग की अनुमति की जरूरत नहीं होगी। मकान या फैक्ट्री के कब्जा प्रमाण पत्र के लिए एनओसी कम होंगी। प्लॉट बांटना, ट्रांसफर करना और सब-लीज आसान होगा।

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सरकार ने निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (EDC) के नियमों में बदलाव किया है। नीति के अनुसार, यदि एग्रीकल्चर जोन में लिया गया कोई औद्योगिक लाइसेंस बाद में शहरी क्षेत्र के दायरे में आ जाता है, तो उसके निर्मित हिस्सेपर कोई ईडीसी नहीं वसूला जाएगा। लाइसेंस के तहत आने वाले शेष खाली या अधूरे हिस्से पर वर्तमान नियमों के अनुसार ईडीसी देय होगा। राज्य के करीब 70% क्षेत्र में अब जमीन के उपयोग (CLU) की अनुमति लेने की जरूरत नहीं। बाकी क्षेत्रों में भी CLU को ऑटोमेटिक करने की तैयारी है। मकान/फैक्ट्री के कब्जा प्रमाण पत्र के लिए कई NOC खत्म होंगी। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। प्लॉट को बांटना, ट्रांसफर करना और सब-लीज आसान होगी। बिना ज्यादा अनुमति के बिजनेस गतिविधि बदली जा सकेगी। “राइट टू बिजनेस एक्ट” के तहत खुद की घोषणा देकर काम शुरू किया जा सकेगा। शुरुआती समय में सरकारी निरीक्षण कम होंगे।