महिला आरक्षण में रोटेशन ठीक, देरी ग़लत

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महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़कर पेश करने की जल्दबाजी सरकार की नीयत पर सवाल उठाती है। पूर्व कुलपति प्रफेसर रूप रेखा वर्मा ने कहा कि बिल लाने के पीछे सत्ता पर कब्जे का उद्देश्य था। ओबीसी महिलाओं की श्रेणी छूट जाना भी सरकार की तैयारी की कमी दर्शाता है। यह चुनावी जुमला मात्र था।

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परिसीमन बिल संसद में धराशायी हो गया। इसे महिला आरक्षण के लिए झटका बताया गया। इस विषय पर लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रफेसर रूप रेखा वर्मा से बात की नाइश हसन ने। पेश है बातचीत के कुछ अहम बिंदु :

n परिसीमन बिल संसद में पास नहीं हो सका, क्या कहना चाहेंगी आप?

यह अच्छा ही हुआ। जिस जल्दबाजी और महिला आरक्षण के झूठे मुखौटे के साथ यह बिल संसद में लाया गया, उससे स्पष्ट था कि बिल लाने के पीछे स्वस्थ विचार नहीं बल्कि परिसीमन के उलटफेर से सत्ता पर अपने कब्जे को बढ़ाने का उद्देश्य है। महिला आरक्षण बिल पहले एक बार लोकसभा से पास हो चुका है। इसके बाद भी उसे लागू करने में की गई देरी ने सरकार की नीयत पर पहले ही सवाल खड़े कर दिए थे। ऐसे में, दोबारा इसे परिसीमन से जोड़कर पेश करने की रणनीति किसी को भ्रमित नहीं कर सकी। यह समझना मुश्किल नहीं था कि महिला आरक्षण केवल एक आवरण है, जिसके भीतर सत्ता के किसी और खेल की पटकथा लिखी जा रही है। विरोधी पक्ष की रणनीति भी कारगर रही। कोई टूटा नहीं, एकता रही, समझदारी रही, यह अच्छी बात थी। जिनको मजबूत विपक्ष न होने की शिकायत थी, उनके लिए भी यह सुखद आश्चर्य था।

n महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद भी उसे परिसीमन और जनगणना से जोड़ कर टाल देना, क्या यह महिलाओं को तुरंत हक देने की नीयत पर सवाल नहीं खड़े करता?

महिला आरक्षण बिल 2023 में पक्ष और विपक्ष, दोनों की रजामंदी से पास हो गया था। उसे फौरन लागू करने के बजाय आगे के लिए टालना बेतुकी बात थी। सरकार की गलत मंशा तभी जाहिर हो गई थी। बहुत से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तभी इस पर ऐतराज किया था। असल में, आरक्षण और परिसीमन के बीच ऐसा कोई घनिष्ठ संबंध नहीं है कि एक के कारण दूसरा रोका जाए। परिसीमन जब होगा, देखा जाएगा। कुल कितनी और कौन-सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, यह परिसीमन के बाद बदलेगा। तो, परिसीमन के बाद तो और भी बहुत कुछ बदलेगा। अगर सरकार महिला आरक्षण संबंधी बदलाव में ही मेहनत से बचना चाहती है, तो संदेह होगी ही। सीधी बात यह है कि अगर संकल्प सच्चा होता, तो 2023 में इस काम को 2029 के लिए स्थगित न किया जाता।

n परिसीमन में ओबीसी महिलाओं की श्रेणी भी छोड़ दी गई। उन्हें उपेक्षित रखने की आखिर मंशा क्या थी?

यह बिल लाने के लिए जो समझ, जो तैयारी और प्रतिबद्धता सरकार की तरफ से होनी चाहिए थी, उसका पूरा अभाव दिखा। इसीलिए ओबीसी की श्रेणी उनसे छूट ही गई। हम, जनता के मामूली लोग, यह भी नहीं जान सकते कि ओबीसी वर्ग जान कर उपेक्षित किया गया या लापरवाही से। जो भी हो, इतना तो साफ है कि इस मुद्दे पर गंभीरता से और संवेदना से सोचने के बजाय इतर लाभों को प्राथमिकता देते हुए बिल लाया गया। इसी वजह से इस बिल के पास न होने पर विपक्ष को निशाने पर रख कर जो हल्ला मचाया जा रहा है, उसका न कोई आधार है और न उसमें कोई ईमानदारी है। इस मुद्दे पर सरकार की यही खामियां यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि महिला आरक्षण के बारे में वह खुद गंभीर नहीं। सरकार की मंशा स्त्री सशक्तिकरण न होकर उसके बहाने से किसी इतर स्वार्थ की पूर्ति है। जिस तरह यह बिल लोकसभा में लाया गया, यह आगे के लिए भी इस बात की नजीर बनेगा कि समाज के किसी बड़े उद्देश्य के साथ खिलवाड़ कैसे किया जा सकता है। इसी कारण यह बार-बार कहा जा रहा है कि सरकार का उद्देश्य महिला आरक्षण था ही नहीं।

n 2023 में बिल पास करना, पर लागू 2029 के बाद करना। क्या यह चुनावी जुमला नहीं ताकि महिला वोट बैंक साधा जा सके?

बिल्कुल चुनावी जुमला मात्र था। महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और दरिंदगी के मामलों और उनमें की गई कमजोर कार्रवाई की वजह से समाज में जो गुस्सा था, उस पर पानी का छींटा डालने की एक कोशिश थी 2023 का बिल। 2029 तक उसे लटकाने का न कोई कारण था, न औचित्य। स्त्रियों के प्रति संवेदनहीनता उसी समय जाहिर हो गई थी, जो आज तक जारी है।

n हर परिसीमन के बाद आरक्षित सीटें रोटेट होंगी। इसका मतलब कोई भी सीट 10 साल से ज्यादा महिला के लिए रिजर्व नहीं रहेगी। क्या इससे महिला नेतृत्व बनने के बजाय हर बार जीरो से शुरुआत नहीं होगी?

सीटों का रोटेट होना मुझे गलत नहीं लगता। पंचायत चुनावों में भी आरक्षण का रोटेशन है। आरक्षण सत्ता में उन लोगों की भागीदारी के दरवाजे खोलता है, जो योग्य हैं लेकिन सामाजिक या आर्थिक पायदान पर ऊपर नहीं। साथ ही, इस तरह की भागीदारी के योग्य बनने की चाहत और कोशिश को जगाने का भी काम करता है। ये चाहत और कोशिश एक ही जगह सीमित न रह जाए, इसके लिए रोटेशन ठीक ही लगता है।