QUAD के नए क़दम

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नई दिल्ली में हुई QUAD देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक ने इस मंच की अहमियत बढ़ाई है। बदलते वैश्विक हालात में QUAD ने नए लक्ष्य तय किए हैं। क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य रेयर अर्थ मिनरल्स में चीन के दबदबे को तोड़ना है। भारत के लिए यह पहल खास महत्व रखती है।

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नई दिल्ली में QUAD के विदेश मंत्रियों की बैठक और वहां से निकली बातों ने इस मंच की अहमियत स्थापित कर दी है। बदले वैश्विक हालात और चुनौतियों को देखते हुए इस मंच ने अपने लिए नए लक्ष्य तय किए हैं। इनमें क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क एक महत्वाकांक्षी कदम है।

बदलते रिश्ते । यह बैठक कई मामलों में महत्वपूर्ण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप जब से चीन के साथ संबंध सुधारने में लगे हैं, तब से QUAD की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे थे। ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के बाद कहा गया कि अब QUAD की जरूरत नहीं, क्योंकि अमेरिका इस मंच के जरिये पेइचिंग को घेरना चाहता था और जब दोस्ती की कोशिशें हो रही हैं, तो वह शी चिनफिंग को असहज नहीं करना चाहेगा।

क्रिटिकल मिनरल्स । लेकिन, वैश्विक राजनीति में बदलाव किसी एक वजह से ही नहीं होता। एक स्वतंत्र और मुक्त हिंद प्रशांत क्षेत्र के लिए चार देश - भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया साथ आए थे। चीन की आक्रामकता को देखते हुए वह जरूरत अब भी है। बल्कि कई दूसरी चुनौतियां भी हैं और अच्छी बात यह है कि मंच ने उन्हें पहचाना। क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क के तहत लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मकसद है रेयर अर्थ मिनरल्स में चीन के दबदबे को तोड़ना।

भारत के लिए जरूरी । तकरीबन हर इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक प्रॉडक्ट के लिए जरूरी रेयर अर्थ मिनरल्स की 90% सप्लाई चीन से होती है। अपनी इस ताकत को उसने जियो-पॉलिटिक्स का हथियार बना लिया है। QUAD मिलकर इस दबदबे को तोड़ सकता है। भारत के लिए यह पहल खास महत्व रखती है। वह पिछले साल दिसंबर में लॉन्च अमेरिका के पैक्स सिलिका इनिशिएटिव का भी हिस्सा है। इसका भी मकसद है कि क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन बाधित न हो।

चीन पर निर्भरता । भारत के पास 6.9 मिलियन मीट्रिक टन रेयर अर्थ का भंडार होने का अनुमान है, लेकिन समस्या है प्रॉसेसिंग क्षमता की। नए निवेश और सहयोग से उसे मदद मिल सकती है। जापान इस मामले में उदाहरण है, जिसने चीन पर निर्भरता को बहुत कम कर लिया है। 2010 में इन दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव हुआ, तो चीन ने रेयर अर्थ की सप्लाई रोक दी। जापान ने तब सबक लेकर रेयर अर्थ माइन्स में खुद ही निवेश किया और अब उसका चीन से आयात 30% तक कम हो चुका है। QUAD बैठक के बाद हिंद प्रशांत क्षेत्र में निगरानी के लिए एक नए इनिशिएटिव की भी घोषणा हुई। ग्लोबल इकॉनमी के लिए खुला समुद्र जरूरी है।