n NBT रिपोर्ट, गाजियाबाद
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के दावों और सरकारी लॉटरी पर भरोसा कर अपने घर का सपना देखने वाले सैकड़ों गरीब खरीदार खुद को ठगे जाने का दर्द झेल रहे हैं। साल 2016 में जीडीए की देखरेख में इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति के तहत बिल्डरों ने महंगे प्राइवेट फ्लैट बेचकर अपनी जेबें भर लीं, लेकिन गरीबों के लिए आरक्षित ईडब्ल्यूएस (EWS) और एलआईजी (LIG) फ्लैट्स अधूरे में छोड़ दिए। अब कई बिल्डरों के ऑफिस बंद हो चुके हैं। अब पीड़ित परिवार जीडीए और बिल्डरों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन और निराशा ही मिल रही है।
50 प्रतिशत से अधिक काम अब भी अधूरा
मालूम हो कि इंटीग्रेटेड टाउनशिप के तहत सात प्रमुख बिल्डरों को 3,469 ईडब्ल्यूएस और 3,469 एलआईजी भवन बनाने थे। अब तक 1,709 ईडब्ल्यूएस और 1,552 एलआईजी भवन ही बने हैं। यानी करीब 50 प्रतिशत से अधिक कार्य अभी भी लंबित है। हैरानी की बात है कि बिल्डरों ने अमीरों के लिए आलीशान कॉलोनी विकसित कर दी, जहां लोग रह रहे हैं, लेकिन गरीबों के ईडब्ल्यूएस टावर को अधूरा छोड़ दिया। इससे साफ है कि गरीबों की गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल बिल्डर ने निजी फायदे के लिए किया।
अधिकारी नहीं कर रहे मदद
आज इस धोखाधड़ी के खिलाफ जब पीड़ित जीडीए के चक्कर काट रहे हैं, तो अधिकारी कोई मदद नहीं कर रहे हैं। वहीं, बिल्डर के रसूखदार अधिकारी फोन बंद कर फरार हैं। शुरुआत में जीडीए की ढिलाई और अब उसकी बेरुखी ने सैकड़ों परिवारों के आशियाने के सपने को मलबे में तब्दील कर दिया है। यह हाल केवल एक बिल्डर के साथ ही नहीं बल्कि मैसर्स एसएमवी एजेंसीज प्रा. लि., और मैसर्स अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रा. मैसर्स क्रॉसिंग इंफ्रा प्रा. लि., मैसर्स यूटिलिटी एस्टेट प्रा. लि. और मैसर्स लैंडक्राफ्ट डेवलपर्स प्रा. लि में भी इस तरह की दिक्कत चल रही है।



