₹5 हज़ार के पुराने धनुष से एशियन गेम्स के गोल्ड तक पहुंचीं कीर्ति

नवभारतटाइम्स.कॉम•
kirti sharmas inspiring story of winning gold at asian games with a 5 thousand old bow
n NBT न्यूज, जींद

एशियन गेम्स में तीरंदाजी का स्वर्ण पदक जीतकर जींद की बेटी कीर्ति शर्मा सोमवार को अपने पैतृक गांव रिटौली पहुंचीं तो ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। जामनी मोड़ से कीर्ति को खुली जीप में गांव तक लाया गया। इस दौरान सबसे भावुक पल तब आया, जब कीर्ति ने अपना स्वर्ण पदक दादा रामजुवारी शर्मा के गले में डालते हुए कहा, दादा, यह आपकी जीत है। दादा ने भी पोती का मेडल ग्रामीणों को दिखाया।
कीर्ति की सफलता की कहानी संघर्ष और परिवार के भरोसे से जुड़ी है। उन्होंने तीरंदाजी की शुरुआत करीब ₹5 हजार के पुराने धनुष से की थी। कीर्ति पिल्लूखेड़ा के एक निजी स्कूल में पढ़ती थीं। वर्ष 2019-20 में कोच उद्यम सिंह वहां डीपीई बनकर आए और उन्होंने कीर्ति की प्रतिभा पहचानकर पिता को तीरंदाजी में आगे बढ़ाने की सलाह दी। धनुष खरीदने दुकान पहुंचे विजय शर्मा उसकी कीमत सुनकर लौटने वाले थे, लेकिन आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने ₹5 हजार में पुराना धनुष खरीद लिया। इसी से कीर्ति का सफर शुरू हुआ। बाद में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में चयन होने पर बेहतर धनुष की जरूरत पड़ी तो पिता ने आढ़ती से ₹60 हजार का कर्ज लेकर नया धनुष खरीदा।

‘देश के लिए मेडल जीतने का सपना था’: गांव पहुंचीं कीर्ति ने कहा कि गेम्स के दौरान उनके दिमाग में सिर्फ देश के लिए मेडल जीतने का सपना था। उन्होंने कहा कि मेहनत और लगन से सबकुछ संभव है। सात साल की मेहनत के बाद वह इस मुकाम तक पहुंची हैं। उन्होंने लोगों से बेटियों को पूरा मौका देने की अपील की।