समझौते की शर्त पर सोचें

नवभारतटाइम्स.कॉम•
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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। किसी भी समझौते का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना भी होना चाहिए। भारत को ऐसी डील करनी चाहिए, जिससे घरेलू उद्योगों, किसानों, छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ मिले। अमेरिका की ओर से टैरिफ लगाने की धमकी देकर दबाव बनाना व्यापारिक संबंधों के अनुकूल नहीं है। भारत आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में उसे अपनी आर्थिक ताकत और कूटनीतिक समझ का इस्तेमाल करते हुए समझौते की हर शर्त पर सावधानी से विचार करना चाहिए।

राहुल शुक्ला, लखनऊ
 अपशब्द का हमेशा विरोध हो

15 अक्टूबर के लेख ‘रोस्टिंग से निकली एक नई भाषा’ में कहा गया है कि Gen G के लिए गालियां बुरी या वर्जित नहीं, बल्कि बात कहने का एक तरीका है। लेखक के इस तर्क से सहमत नहीं हुआ जा सकता। यह बात शायद ही किसी के गले उतरे। लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात कहने का पूरा हक है, लेकिन सभ्यता को कभी नहीं भूलना चाहिए। माना कि आंदोलनों में अक्सर लोग जोश में आकर होश खो देते हैं। ऐसा अनजाने में या भावों के बहाव में हो जाए, तो माफ किया जा सकता है, लेकिन यदि जान-बूझकर ऐसा किया जाए, तो उसकी हमेशा आलोचना होनी चाहिए। हमारे यहां तो यही कहा जाता है कि ‘ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय...।’ अपशब्द किसी को अच्छा नहीं लगता, इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता।

इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैंप, दिल्ली