Is The Golden Era Of Small And Midcap Stocks Over Expensive Valuations And Market Downturn Become Obstacles
महंगा होना बनी बाधा: क्या खत्म हो गया स्मॉल और मिडकैप का सुनहरा दौर?
नवभारतटाइम्स.कॉम•
nNBT रिपोर्ट, नई दिल्ली:
भारतीय शेयर बाजार में हाल ही में आई बिकवाली की वजह से निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स करेक्शन (सुधार/गिरावट) के दौर में पहुंच गया है। वहीं, स्मॉल-कैप और माइक्रो-कैप इंडेक्स भी इससे ज्यादा दूर नहीं हैं। गुरुवार को गिरावट के बाद निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स अपने 31 अगस्त के 52-हफ्ते के ऑल टाइम हाई से 10.2% नीचे आ चुका है। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स अपने 8 सितंबर के हाई से 8% टूट चुका है।वहीं निफ्टी माइक्रोकैप 250 इंडेक्स में 2.6% की भारी गिरावट आई है, जिससे यह अक्टूबर के पहले हफ्ते के अपने हालिया हाई से 8.1% नीचे आ गया है। वहीं, इस साल अब तक सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 15% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
वैसे तो बाजार में करेक्शन की कोई एक तय परिभाषा नहीं है, लेकिन आमतौर पर हालिया हाई से 10% या उससे अधिक (पर 20% से कम) की गिरावट को करेक्शन माना जाता है।
ET के मुताबिक, पिछले दो सालों में म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में सीधे निवेश के जरिए रिटेल निवेशकों के भारी पैसे के आने से स्मॉलकैप शेयर बाजार के सुस्त माहौल और लार्जकैप शेयरों की भारी गिरावट के बावजूद टिके रहे। लेकिन अब कंपनियों की अत्यधिक वैल्यूएशन (महंगे दाम) को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। निवेशक यह देख रहे हैं कि क्या बाजार के इस खराब माहौल का असर उनके भविष्य के मुनाफे पर पड़ सकता है।
पिछले दो सालों में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स तीन-तीन बार करेक्शन के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। मिडकैप इंडेक्स जनवरी 2025 के अपने हाई से फरवरी के निचले स्तर तक लगभग 19% गिरा था। स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 26% गिरकर मंदी के दौर में पहुंच गया था, हालांकि बाद में इसमें रिकवरी आ गई थी।