चकाचौंध भरे जापान में अकेलापन बड़ी समस्या

नवभारतटाइम्स.कॉम•
loneliness in japan declining population and changing youth mindset amidst modernity
तोक्यो से ओसाका की यात्रा हम लोगों ने बुलेट ट्रेन से की थी। इस ट्रेन की तेज गति का अहसास अंदर बैठकर नहीं होता। ट्रेन 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के बाद भी हिचकोले नहीं खाती, जबकि भारत में रेल की यात्रा पूरी करने के बाद अगली रात को घर में सोने पर भी लगता है कि बेड हिल रहा है। जापानी बुलेट ट्रेनों में सीटों की नंबरिंग हवाई जहाज की तरह ही होती है - रो नंबर 10 में सीट ए, बी, सी, डी, ई...। ओसाका में हम जिस होटल में रुके, उसने शहर दिखाने के लिए एक गाइड भी दिया। वह 28 साल की लड़की थी, नाम था जॉयाना।

उन्होंने स्पेलिंग के साथ अपना नाम बताया था ताकि कोई उन्हें जोआना न कहे। वह हम लोगों को 15वीं सदी का एक किला दिखाने ले गईं। किले के बाहर जो मोट (नहर की चौड़ाई वाली नाली जो भारतीय किले में भी होती थी) था, उसका पानी बिल्कुल साफ था। जापान के लोग आधुनिकता के साथ अपनी विरासत को भी सहेजे हुए हैं। वहां से हम एक जापानी बौद्ध मंदिर गए। यहां मैंने और टीम के एक अन्य सदस्य ने जॉयाना से बात की। उन्होंने बताया कि उनके चाइनीज पिता और जापानी माता क्योटो में रहते हैं और वह अकेली ओसाका में। वह कभी शादी नहीं करना चाहतीं, न ही उनका कोई बॉयफ्रेंड है। उनका सपना दुनिया घूमने का है। वह फ्रांस जाना चाहती हैं...अमेरिका देखना चाहती हैं। मेरे साथी ने जब उनसे पूछा कि क्या उन्हें बच्चे पसंद नहीं हैं? जॉयाना ने कहा कि बच्चे पसंद हैं, लेकिन वह खुद के बच्चे नहीं चाहतीं। उन्होंने यह भी बताया कि जापान में 30% युवा शादी नहीं करना चाहते। यह जापान की इकॉनमी के लिए बुरी खबर है, जहां कामकाजी आबादी घट रही है। टोटल फर्टिलिटी रेट 1.14 है, जबकि आबादी को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के लिए इसे 2.1 होना चाहिए। दुनिया के कई देश घटती आबादी की चुनौती से जूझ रहे हैं। अभी तक एक भी देश इसका हल नहीं ढूंढ पाया है। भारत में भी सिक्किम और दक्षिण के राज्यों में यह दर काफी कम है। जॉयाना दुनिया भर में हो रहे इस बदलाव का प्रतिनिधि चेहरा हैं। वह दुनिया की ऐसी तमाम युवा लड़कियों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो पितृसत्तात्मक सोच की संतुष्टि और पूंजीवाद की भट्ठी में खुद को झोंकने के लिए तैयार नहीं।
जॉयाना की बातें सुनकर मुझे ब्रिटिश ऐक्टर ब्रैंडन फ्रेजर (जो ममी सीरीज की फिल्मों में काम कर चुके हैं) अभिनीत ‘रेंटल फैमिली’ नाम की फिल्म की भी याद आई। इस फिल्म में दिखाया गया है कि जापान में लोग अकेलेपन को दूर करने के लिए रिश्तेदार-बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड किराये पर लेते हैं। यह जापानी समाज की ऐसी सचाई है, जिसे दूसरे लोग नहीं समझ सकते।

ओसाका से हम लोग बुलेट ट्रेन से ही तोक्यो लौटे और अगली सुबह हानेदा एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। 6 दिनों के प्रवास के दौरान मैंने तोक्यो, नागोया और ओसाका की यात्रा की। मगर क्या मैं जापान और जापानियों को समझ पाया? पिको अय्यर की तरह अगर मेरा फिर कभी जापान जाना हुआ तो मैं जरूर इस सवाल का जवाब ढूंढना चाहूंगा कि पहली बार में जापान जितना मुझे समझ में आया, क्या दूसरी बार में मैं उसे उससे कम समझ पाऊंगा?