महिलाओं की भागीदारी

नवभारतटाइम्स.कॉम•
rani of jhansi regiment of azad hind fauj a symbol of women empowerment inspired by netaji
नेताजी सुभाषचंद्र बोस का मानना था कि देश की आजादी की लड़ाई में महिलाओं की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है, जितनी पुरुषों की। इसी सोच के साथ 22 अक्टूबर 1943 को उन्होंने आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजीमेंट का औपचारिक उद् घाटन किया। यह एक ऐतिहासिक पहल थी। डॉ. लक्ष्मी स्वामीनाथन के नेतृत्व में इस रेजीमेंट में करीब एक हजार महिलाओं ने हिस्सा लिया। योग्य महिला सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार किया गया, जबकि अन्य महिलाओं ने नर्सिंग और चिकित्सा सेवाओं में योगदान दिया। इस पहल ने साबित किया कि साहस, अनुशासन और देशभक्ति किसी एक जेंडर तक सीमित नहीं हैं। नेताजी की प्रेरणा से रेजीमेंट की महिलाओं में आत्मविश्वास और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा पैदा हुआ। इस तरह स्वतंत्रता की लड़ाई के साथ महिला सशक्तीकरण का संदेश भी फैलने लगा। रानी झांसी रेजीमेंट केवल एक सैन्य इकाई नहीं थी, यह उस सोच का प्रतीक थी, जिसमें महिलाओं को समान अवसर और जिम्मेदारी देने की बात थी।