जर्मन उद्योगपतियों को समझाया 'शुभ लाभ' का मतलब

नवभारतटाइम्स.कॉम•
shubh labh explained to german industrialists aim to take india germany trade to 310 billion euros
nबर्लिन : मौका व्यापार और निवेश को नई ऊंचाई देने की बातचीत का था, पर चर्चा दो संस्कृतियों की साझेदारी की गहराई की ओर जाए बिना नहीं रह सकी। जर्मनी की आर्थिक और ऊर्जा मामलों की मंत्री कैथरीन राइचे को कवि गुरु रवींद्र नाथ टैगोर याद आए। वहीं, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मन उद्योगपतियों को ' शुभ लाभ ' का मतलब समझाते हुए कहा कि ईमानदारी से लाभ कमाना भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है और मौजूदा वैश्विक हालात में भरोसा ही सबसे अहम पहलू बन चुका है, जो भारत दे सकता है। मौका था यहां जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के इंडिया सेंटर के उद्घाटन का।

गोयल ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता में भारत और जर्मनी के लिए कई अवसर हैं। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार को दस गुना कर 310 बिलियन यूरो तक ले जाने की बात की। उन्होंने अगले 4-5 महीनो में यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने की उम्मीद जताई, जिस पर दिसंबर में दस्तखत होने वाले हैं।
राइचे ने कहा, 'रवींद्र नाथ टैगोर ने कहा था कि भारत को पूरे यूरोप में जर्मनी से बेहतर कोई नहीं समझता।' जर्मन एनर्जी मिनिस्टर ने कहा, 'भारत की ग्रोथ पिछले एक दशक में शानदार रही है और मार्केट की अगुवाई करने की इसमें अपार इच्छाशक्ति दिखती है।' राइचे ने भारत-EU के FTA से व्यापार और निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई। उन्होंने भारत के साथ सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, टेक्नॉलजी, ऑटोमोटिव सेक्टर सहित कई क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों की बात की और कहा कि भारत टेक्नॉलजी पर अमल करने के लिहाज से अहम देश है।

गोयल ने कहा, 'यूरोपियन यूनियन के साथ FTA पर दिसंबर में दस्तखत होने जा रहे हैं। अगले 4-5 महीनों में यह समझौता लागू होने की उम्मीद है।' गोयल ने कहा, 'भारत में पहले ही 2000 के करीब जर्मन कंपनियां हैं। वैश्विक अनिश्चितता भारत और जर्मनी के लिए नए अवसर भी बना रही है। भारत युवा जोश वाला देश है। हम जर्मनी को रोल मॉडल की तरह देखते हैं। हम जर्मनी से सीखना चाहते हैं, साथ मिलकर काम करना चाहते हैं और एक-दूसरे के पूरक बनना चाहते हैं।'

गोयल ने कहा, 'भारत के एक महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने जीरो की खोज की। हमारे बीच 31 बिलियन यूरो का व्यापार है। अगर हम इसमें जीरो जोड़ दें और इसे 310 कर दें, तो कैसा लगेगा?' उन्होंने कहा कि यह बहुत साहसिक नंबर लग सकता है, लेकिन इस बारे में कारोबारियों को फैसला करना है और योजना बनानी है। उन्होंने कहा कि प्रिसिजन इंजीनियरिंग, टेक्निकल स्किल और क्वॉलिटी में जर्मनी की महारत को भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल क्षमता और कुशल वर्कफोर्स के साथ मिला दिया जाए तो दोनों देशों को बहुत फायदा होगा।