When Robots Do All The Work What Will Happen To Money A Deep Question On The Future Economy
सब रोबॉट करेगा तो क्या रहेगी पैसों की क़ीमत
नवभारतटाइम्स.कॉम•
कल्पना कीजिए, वर्ष 2036 की एक सुबह रोबॉट घर के काम निपटा रहा है, खेतों और कारखानों में मशीनें मेहनत कर रही हैं, जबकि AI रिसर्च में मदद कर रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मशीनें हमारे लिए इतना कुछ कर सकती हैं, तो इंसान काम क्यों करेगा? और अगर काम आय का मुख्य साधन नहीं रहा, तो पैसे की जरूरत क्यों होगी? AI, रोबॉटिक्स और ऑटोमेशन की तेज प्रगति ने इस सवाल को अर्थव्यवस्था की गंभीर बहस बना दिया है। काम, आय, उपभोग और संपत्ति के संबंधों को तकनीक बदल सकती है।
बाजार कौन चलाएगा । आधुनिक अर्थव्यवस्था में इंसान काम करता है, कमाता है और उससे सामान खरीदता है। इससे मांग पैदा होती है और कंपनियां उत्पादन बढ़ाती हैं। लेकिन, रोबॉट आने से किसी कारखाने में एक हजार की जगह सौ कर्मचारी ही जरूरी रह जाएं, तो बाकी लोगों की आय का क्या होगा? यदि ऐसा लाखों कंपनियों में होने लगे, तो समस्या केवल बेरोजगारी की नहीं, क्रय शक्ति की भी होगी। कंपनियां अधिक सामान बना सकेंगी, लेकिन उसे खरीदने वालों के पास पर्याप्त पैसा नहीं होगा। यानी चुनौती उत्पादन की नहीं, उसे खरीदने की क्षमता की होगी।भूमिका बदलेगी । पैसे की ताकत का एक बड़ा आधार वस्तुओं और सेवाओं की दुर्लभता है। यदि रोबॉट बड़े पैमाने पर उत्पादन करने लगें और AI बौद्धिक श्रम की लागत कम कर दे, तो अनेक वस्तुएं और सेवाएं सस्ती हो सकती हैं। हालांकि, जमीन, दुर्लभ खनिज, स्वच्छ पानी और ऊर्जा जैसे संसाधन सीमित रहेंगे। इसलिए पैसा समाप्त होने के बजाय अपनी भूमिका बदल सकता है। बुनियादी वस्तुओं के लिए जरूरत कम हो सकती है, जबकि दुर्लभ संसाधनों के लिए उसका महत्व बना रहेगा।
नियंत्रण किसका । भविष्य की बड़ी चुनौती यह होगी कि रोबॉट और AI का मालिक कौन होगा। यदि इन पर कुछ बड़ी कंपनियों का नियंत्रण रहा, तो तकनीक से पैदा होने वाली संपदा भी उन्हीं तक सीमित रह सकती है। इस संदर्भ में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की अवधारणा महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि मशीनें उत्पादन का बड़ा हिस्सा संभालने लगें और रोजगार घटे, तो सरकार प्रत्येक नागरिक को न्यूनतम आय देने पर विचार कर सकती है, ताकि बुनियादी जरूरतें नौकरी पर निर्भर न रहें। इसके साथ सस्ती सार्वजनिक सेवाएं भी जरूरी हैं।
इंसान क्या करेगा । काम केवल पैसे कमाने का साधन नहीं, हमारी पहचान और सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है। लेकिन, यदि बुनियादी जरूरतों के लिए नौकरी जरूरी नहीं रही, तो लोग मजबूरी के बजाय रुचि और संतुष्टि के लिए काम कर सकेंगे। रोजगार का स्वरूप बदलेगा, लेकिन योगदान की जरूरत समाप्त नहीं होगी। ऐसे में सरकार को तकनीक से पैदा होने वाली संपदा के वितरण, बाजार में प्रतिस्पर्धा, डेटा अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता पर अधिक ध्यान देना होगा।