गेंदबाज़ों की होनी चाहिए वापसी

Contributed by: विधांशु कुमार|नवभारतटाइम्स.कॉम•
batsmens dominance in cricket is a bowlers comeback possible
साल था 1952। हेडिंग्ले टेस्ट में भारत ने शून्य रन पर चार विकेट गंवा दिए थे। इनमें से तीन विकेट इंग्लैंड की तरफ से पदार्पण कर रहे फ्रेड ट्रूमैन ने लिए थे। कहा जाता है कि उनकी गति और आउटस्विंग इतनी घातक साबित हो रही थी कि बल्लेबाज पॉली उमरीगर ने साइट स्क्रीन ठीक करवाने के बहाने खेल रुकवाया। अंपायर ने पूछा, 'स्क्रीन कहां लगवानी है?' तो जवाब आया, 'मेरे और इस गेंदबाज के बीच।' तब क्रिकेट में गेंद और बल्ले का संघर्ष बराबरी का था। ट्रूमैन ने इसे दुनिया का सबसे महान खेल बताया और कहा कि यह हर किसी का घमंड तोड़कर सबको बराबर कर देता है।

गारंटी नहीं । आज शतक लगाने वाला बल्लेबाज अगले मैच में शून्य पर पविलियन लौट सकता है और किसी मैच में पांच विकेट लेने वाला गेंदबाज अगली पारी में पिट सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि आज के दौर में वनडे और टी20 मैचों में कोई भी स्कोर सुरक्षित नजर नहीं आता। इसी गुरुवार को श्रीलंका ने इंग्लैंड के खिलाफ वनडे में 429 का लक्ष्य हासिल कर लिया। भारतीय टीम पिछले दिनों वेस्टइंडीज के सामने बहुत आराम से 406 रनों का पीछा कर चुकी है।
टी-20 और मुश्किल । सबसे छोटे फॉर्मेट में तो बड़े लक्ष्य और भी आसानी से भेदे जा रहे हैं। न्यूजीलैंड टूर पर पहले टी20 मुकाबले में भारतीय टीम ने 225 को चेज कर लिया। वहीं, रांची में वह वेस्टइंडीज के सामने 250 भी नहीं बचा पाई थी। पहले जो स्कोर जीत की गारंटी माने जाते थे, वह अब सिर्फ एक चुनौती बन गए हैं। सवाल है कि क्या बल्ला अब गेंद पर पूरी तरह से हावी हो चुका है?

छक्कों की बारिश । ये कैसे हुआ इसका जवाब कई जगह है। 2008 में खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पहले संस्करण में 622 छक्के लगे था। 2026 में छक्कों की संख्या 1,426 हो गई। हालांकि, इतने बरसों में मैच की संख्या बढ़ी है, लेकिन प्रति मैच छक्के की दर 10.5 से 19 हो चुकी है। यही हाल टी20 वर्ल्ड कप का भी है। साल 2024 के टी20 वर्ल्ड कप के 52 मैचों में 517 छक्के लगे, जबकि 2026 के 54 मैचों में 780। इसका असर औसत स्कोर पर भी दिखता है- 2026 के IPL में पहली पारी का औसत स्कोर 192 रन रहा, जबकि जीतने वाली टीम का औसत स्कोर था 217 रन।

रिवर्स स्विंग मुश्किल । पिछले बरसों में क्रिकेट के नियमों में ऐसे बदलाव हुए, जो सिर्फ बल्लेबाजों को फायदा पहुंचा रहे। मसलन एकदिवसीय मैच में दोनों छोर से नई गेंद लेने का नियम आया तो गेंद कभी पुरानी ही नहीं हुई। रिवर्स स्विंग गायब हो गई, जो डेथ ओवरों में सबसे बड़ा हथियार थी।

एक जैसी पिच । रविचंद्रन अश्विन भी मानते हैं कि अब हर पिच एक जैसी है। पहले अगर भारत के कई मैदानों पर बड़े स्कोर बनते थे, तो ऑस्ट्रेलिया या न्यूजीलैंड में बल्लेबाजों को संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन, अब सभी जगह एक जैसे विकेट हैं, गेंद अच्छे से बल्ले पर आती है और आड़े-तिरछे शॉट्स पर भी बाउंड्री मिल जाती है।

खेल बना तमाशा । इन बदलावों के पीछे है खेल से अंधाधुंध पैसा कमाने की ललक। श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर मुथैया मुरलीधरन का कहना है कि प्रसारक और प्रायोजकों ने मिलकर खेल को ऐसा तमाशा बना दिया है कि हर गेंद पर बाउंड्री की उम्मीद की जाती है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल IPL है, जिसके 2023 से 2027 तक के लिए मीडिया अधिकार 48,390 करोड़ रुपये में बिके, जो उससे पांच साल पहले की रकम 16,347 करोड़ रुपये से लगभग तीन गुना अधिक है। क्रिकेट में छक्का सबसे बिकाऊ है। सिक्स लगने पर दर्शक अपनी सीट से खड़ा हो जाता है और टीवी पर इसके खूब रिप्ले दिखाए जाते हैं।

सलाह माने ICC । आज पलड़ा बल्लेबाज की तरफ झुका नजर आता है। इसे ठीक करने के रास्ते हैं। इंटरनैशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को महान खिलाड़ियों को सुनना चाहिए। सचिन तेंडुलकर पावरप्ले को दो टुकड़ों में बांटने की बात करते हैं, तो टॉम मूडी और इयान बिशप संतुलित पिच चाहते हैं। बड़े स्कोर बुरे नहीं और उनका रोमांच भी असली है, लेकिन अगर गेंदबाज सिर्फ दर्शक बनकर रह गया तो नुकसान खेल का ही होगा। सवाल है कि क्या क्रिकेट गेंदबाज को वापसी करने का मौका देगा?