नौकरी मिले तो बात बने

नवभारतटाइम्स.कॉम•
job uncertainty after internship the path to solutions
23 अक्टूबर का लेख ‘ इंटर्नशिप से रोजगार तक बने राह’ पढ़कर जाना कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना बेरोजगार युवाओं को बड़ी कंपनियों में काम सीखने, व्यावहारिक अनुभव हासिल करने और रोजगार के योग्य बनने का अवसर देती है। हर महीने मिलने वाला मानदेय भी उन्हें आर्थिक सहारा दे सकता है। लेकिन योजना का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब इंटर्नशिप के बाद नौकरी पाने की संभावनाएं बढ़ें। अब तक बड़ी संख्या में ऑफर मिलने के बावजूद कम युवाओं ने उन्हें स्वीकार किया और स्थायी रोजगार पाने वालों की संख्या भी सीमित रही है। इसकी प्रमुख वजहों में काम का युवाओं की योग्यता से मेल न खाना, दूसरे शहरों में रहने का खर्च और इंटर्नशिप के बाद नौकरी की अनिश्चितता शामिल हैं। समाधान के लिए स्टाफिंग कंपनियों को योजना से जोड़ना चाहिए।

प्रमोद तिवारी, नोएडा
 नियमित निगरानी जरूरी

यह पत्र 22 अक्टूबर के संपादकीय ‘स्थायी उपाय चाहिए’ से संबंधित है। वायु प्रदूषण की समस्या केवल सर्दियों या पराली जलाने तक सीमित नहीं है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और कोयले पर निर्भरता भी इसके प्रमुख कारण हैं। अल-नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियां प्रदूषकों के जमाव को बढ़ा सकती हैं, लेकिन प्रदूषण की जड़ें साल भर चलने वाली गतिविधियों में हैं। GRAP जैसे तात्कालिक उपाय जरूरी हैं, पर इनसे स्थायी समाधान नहीं मिलेगा। इसके लिए वाहनों के उत्सर्जन पर सख्ती, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण तथा उद्योगों की नियमित निगरानी जरूरी है।

देविका रानी, पीतमपुरा