Indias Economy Strong In Tough Times Gdp Growth 78 Better Than Expected Performance
बुरे दौर में दमदार
नवभारतटाइम्स.कॉम•
भारत की इकॉनमी में फैलाव के ताजा आंकड़ों को उम्मीद से बेहतर माना जा रहा है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 7.8% तक बढ़ गया। अमेरिका और ईरान के बीच जंग से सप्लाई चेन में जिस तरह बाधा आई थी, उसके बावजूद यह सरकारी आंकड़ा भरोसा जगाने वाला है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7% से अधिक की जीडीपी विकास दर दर्ज की है।
मजबूती के संकेत । इस बार आशंका थी कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेश में कमी के कारण बुरा असर होगा। स्थिति को और खराब करने के लिए अल नीनो का असर भी गिना जाने लगा। बारिश की कमी से खाद्य उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बताया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले भारतीयों से सोने की खरीदारी बंद करने की अपील की थी। ईंधन की खपत को कम करने का आग्रह भी था। लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत का प्रदर्शन उतना खराब नहीं रहा है, जितना कि डर था। भारत की घरेलू मांग की मजबूती के संकेत लगातार मिल रहे हैं। कम उम्मीदों वाली तिमाही के बावजूद । एक नए वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही से आमतौर पर ज्यादा उम्मीदें नहीं होती हैं। चूंकि पुराने वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही व्यस्त होती है, उसके बाद आर्थिक गतिविधियां थोड़ी धीमी हो जाती हैं। कॉरपोरेट परफॉर्मेंस और लोन की डिमांड के मामले में यह अवधि सबसे कमजोर होती है। इस वित्त वर्ष के पहले तीन महीने अलग रहे। पिछले एक दशक से अधिक समय में बैंक लोन की मांग के लिए ये वक्त सबसे अच्छा रहा है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ना भारत के लिए गर्व की बात है।
चुनौतियां भी । इस दौर में हमारा काम केवल उपलब्धि का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपी चुनौतियों को भी रेखांकित करना है। सवाल है कि क्या यह तेजी आम भारतीयों के लिए बेहतर नौकरियां ला रही है? आम आदमी तो यही देखेगा कि आर्थिक आंकड़े उसके जीवन स्तर में कितना बदलाव ला रहे हैं। जीडीपी से हमें पता चलता है कि अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से बढ़ रही है। इससे हमेशा नहीं पता चलता कि उस विकास का अनुभव कैसे किया जा रहा है। देखना होगा कि अगले कुछ महीनों में जंग के हालात कैसे रहते हैं, कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं। निजी निवेश का यह उत्साह कितना टिकाऊ साबित होता है, इसी पर आगे की आर्थिक कहानी निर्भर करेगी। यदि विकास का लाभ सीमित वर्ग तक सिमट जाता है तो असमानता बढ़ सकती है।