Why Is India Lagging In Food Labeling Supreme Court Raises Questions What Is The Reason
फूड लेबलिंग में क्यों पीछे रहा भारत
नवभारतटाइम्स.कॉम•
हम जो खा रहे हैं वह कितना सुरक्षित है, इसकी निगरानी करने वाली सरकारी व्यवस्था कमजोर दिखती है। सब्जियों, अनाज, दूध, मसालों और पैकेज्ड फूड की गुणवत्ता पर आए दिन सवाल खड़े होते हैं। पैकेट पर उत्पाद में मौजूद चीनी, नमक, वसा और अन्य पोषक तत्वों की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वे अपने और परिवार के लिए सही और सुरक्षित खाद्य पदार्थ चुन सकें।
अदालत के सवाल । पैकेज्ड फूड की क्वॉलिटी और लेबलिंग पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी महत्वपूर्ण है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने फ्रंट-ऑफ-पैकेज-लेबलिंग (FOPL) पर केंद्र और FSSAI के रुख पर सवाल उठाए। अदालत ने दो टूक पूछा कि जब कई देश बेहतर फूड लेबलिंग अपना रहे हैं, तो भारत क्यों पीछे है? तर्क खारिज । FSSAI का तर्क था कि भारतीय खानपान की आदतों और अंतरराष्ट्रीय मानकों में अंतर है। इसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। इससे संदेश मिला कि भारत को बेहतर मानकों की ओर बढ़ना चाहिए। महाराष्ट्र के 'सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र' अभियान से पता चल गया कि अगर सिस्टम चाहे तो प्रभावी निगरानी से कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार की हिचक । मोटापा, खराब खानपान और जरूरत से ज्यादा प्रॉसेस्ड फूड चिंता बढ़ाते हैं। अधिक चीनी, नमक और वसा स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। पैकेट पर अगर स्पष्ट चेतावनी दी जाए, तो उपभोक्ता सोच-समझकर चयन कर सकता है। चिली और कनाडा जैसे देशों में ऐसा होता है, लेकिन हमारी सरकार हिचकती है।
कैसे करें भरोसा । हमारे अनाज, फल-सब्जियां और मसाले कई बार विदेशी खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे न उतरने के कारण रोके गए हैं। कई लोकप्रिय ब्रैंड के उत्पादों पर भी सवाल खड़े हो चुके हैं। हमें सिर्फ तसल्ली होती है कि जो भी हम खरीद रहे हैं सरकार ने उसकी निगरानी की होगी। लेकिन, जब निगरानी ही कमजोर हो, तो भरोसा कैसे कायम रहेगा? इसलिए सरकार की जिम्मेदारी केवल बीमारी का इलाज नहीं, नागरिकों को बीमार होने से बचाना भी है।
जानना अधिकार । स्वस्थ रहने की शुरुआत हमारी रसोई से होती है। इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि बाजार में बिकने वाला भोजन सुरक्षित हो। साथ ही, हमें बच्चों को शुरू से लेबल पढ़ना, सही भोजन चुनना और सक्रिय रहने की सीख देनी होगी। FSSAI की प्रस्तावित व्यवस्था में ज्यादा चीनी, नमक या वसा वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर लाल चेतावनी चिह्न लगाने की बात की गई है। जबकि चिली, मैक्सिको और इस्राइल में खाने के पैकेट पर स्पष्ट रूप से हाई साल्ट, हाई शुगर या हाई फैट लिखना अनिवार्य है। आखिर हम क्या खा रहे हैं, यह जानना हमारा अधिकार है। भोजन असुरक्षित होगा तो सेहत की सुरक्षा कौन करेगा?