Natures Interference Nepal Floods And Chitrakoots Devastation Destruction In The Name Of Development
प्रकृति से छेड़छाड़
नवभारतटाइम्स.कॉम•
नेपाल में आई बाढ़ से हुई भारी तबाही के दृश्य देखकर न केवल केदारनाथ त्रासदी की याद ताजा हो गई, बल्कि मन भी दहल उठा। लगातार हो रही भारी बारिश ने चित्रकूट में भी जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि प्रकृति की अनदेखी और उसके अंधाधुंध दोहन का दुष्परिणाम अब हमें प्राकृतिक आपदाओं के रूप में भुगतना पड़ रहा है। विकास के नाम पर जंगलों की कटाई , नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में हस्तक्षेप और पर्यावरणीय संतुलन की उपेक्षा गंभीर चिंता का विषय है। इंसान को प्रकृति को चुनौती देने के बजाय उसके साथ सामंजस्य स्थापित करना चाहिए। पर्यावरण संतुलन बनाए रखकर ही हम ऐसी आपदाओं के जोखिम को कम कर सकते हैं।