परिवर्तन चमत्कार नहीं, आप भी इसे करने में सक्षम हैं

Contributed byबरखा मदान|नवभारतटाइम्स.कॉम
change is not a miracle you are also capable of doing it learn the art of changing life
बदलना जीवन की नियति है और रूपांतरित होना हमारी जागृति। समय हमें बदलता है, परिस्थितियां बदलती हैं, रिश्ते बदलते हैं, हमारा शरीर बदलता है और हमारी सोच भी निरंतर बदलती रहती है। परिवर्तन जीवन का स्वाभाविक नियम है, लेकिन हर परिवर्तन रूपांतरण नहीं होता। परिवर्तन हमारे व्यवहार को बदल सकता है, लेकिन रूपांतरण हमारे देखने के ढंग को बदल देता है। परिवर्तन हमें कुछ और बना सकता है, रूपांतरण हमें यह देखने की क्षमता देता है कि हम वास्तव में किससे बंधे हुए थे। हम अक्सर परिवर्तन की बात ऐसे करते हैं, जैसे वह कोई चमत्कार हो, जैसे बदल पाना केवल कुछ विशेष लोगों के लिए ही संभव हो।

हम किसी व्यक्ति को क्रोध, नशे, घृणा, भय या निराशा से बाहर आते देखते हैं और सोचते हैं- काश, मैं भी बदल पाता। लेकिन भीतर कहीं हम यह मान चुके होते हैं कि ‘मैं ऐसा ही हूं। मुझसे नहीं बदला जाएगा।’ बुद्ध हमें अपनी नकारात्मक भावनाओं और मानसिक अवस्थाओं को दबाने के लिए नहीं कहते। न ही वह उनसे भागने या नकारने की शिक्षा देते हैं। अंगुलिमाल जन्म से हिंसक नहीं था। गलत मार्गदर्शन ने उसकी निष्ठा को ही उसके विनाश का साधन बना दिया। अपने गुरु की आज्ञा पूरी करने के लिए उसने लोगों के प्रति हिंसा करनी शुरू कर दी और उनकी अंगुलियों की माला पहनने लगा। लेकिन, सही गुरु हमें अपने ऊपर निर्भर नहीं बनाता। वह हमें अपने भीतर की बुद्धि और स्वतंत्रता की ओर ले जाता है।
अंगुलिमाल की समस्या केवल उसके कर्मों में नहीं थी। फिर उसकी भेंट बुद्ध से हुई। वह बुद्ध के पीछे दौड़ता रहा, लेकिन उन्हें पकड़ नहीं सका। अंत में उसने चिल्लाकर कहा, ‘रुकिए।’ बुद्ध ने कहा, ‘मैं रुक गया, तुम अभी नहीं रुके हो।’ यह केवल शब्दों का खेल नहीं था। पहली बार उसे अपने जीवन की दिशा का बोध हुआ और उसने उसे बदलने का निर्णय लिया। इसके बाद हुआ उसका रूपांतरण। हर बार जब हम करुणा, धैर्य और विवेक को चुनते हैं, तो अपने मन को एक नई दिशा देते हैं।

(लेखिका बौद्ध भिक्षुणी हैं)