Delhi Building Collapse The Terrifying Spectacle Of Negligence When Will The Administration Wake Up
लापरवाहियों का असर
नवभारतटाइम्स.कॉम•
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर पड़ी। यह सिर्फ एक और हादसा नहीं, वे सवाल हैं जो बार-बार देश के विभिन्न शहरों में खड़े होते रहते हैं - आखिर अवैध और असुरक्षित इमारतों पर प्रशासन की पहले नजर क्यों नहीं पड़ती, कैसे इनमें निर्माण जारी रहता है, और कैसे बिल्डिंग बनती किसी और मकसद से है पर इस्तेमाल किसी और मकसद में होने लगती है।
इमारत में पीजी । यह इलाका दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास है। हजारों स्टूडेंट्स यहां की संकरी गलियों में खड़ी तंग इमारतों के छोटे-छोटे कमरों में रहते हैं। इस इमारत में भी पीजी था। अभी तक की जानकारी के मुताबिक, बेसमेंट में कुछ काम चल रहा था। लगातार हो रही बारिश, कमजोर नींव और ऊपर से अनियमित निर्माण - लापरवाहियों की यह कड़ी तमाम जगह दिखती है।हादसे का इंतजार । इसी साल मई में साकेत के सैदुलाबाज में भी एक इमारत गिर गई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हुई। वहां कोर्ट में दायर याचिका और अथॉरिटीज को अवैध निर्माण की जानकारी होने के बावजूद काम चलता रहा था। दुर्घटना के बाद MCD ने तेजी दिखाई और आसपास कई इमारतों को नोटिस दिया गया। तब पूरी दिल्ली में इस तरह के निर्माण का ऑडिट कराने की बात कही गई थी। कुछ कार्रवाई हुई भी। लेकिन, क्यों हर कार्रवाई ऐसे हादसों का इंतजार करती है?
लालच पड़ता भारी । यह लिखे जाने तक सत्य निकेतन में बचाव कार्य चल रहा था। नुकसान की सही तस्वीर आने में वक्त लग सकता है। लेकिन, यह हादसा एक और बड़ी परीक्षा है - इस इलाके में ऐसे और भी निर्माण हो सकते हैं। जल्द से जल्द उनकी जांच करनी होगी। एक और पहलू यह भी है कि पढ़ाई या इलाज के बड़े ठिकानों के आसपास बेसिक सुविधाएं कितनी कमजोर हैं। लोग ऐसी जगहों पर इसलिए रहते हैं, क्योंकि उनके पास दूसरा विकल्प नहीं। कुछ लोग इसी का बेजा फायदा उठाते हैं। ज्यादा से ज्यादा किराया वसूली के चक्कर में नियमों से खिलवाड़ किया जाता है। सिविक एजेंसियां भी इन बातों को तब तक नजरअंदाज करती रहती हैं, जब तक कोई दुर्घटना नहीं हो जाती।
कड़ी निगरानी । अब फिर से एक्शन का सिलसिला शुरू होगा। कुछ गिरफ्तारियां और कुछ निलंबन भी हो सकते हैं, लेकिन यह असल में केवल प्रतिक्रिया है। इससे सुधार नहीं होने वाला। कार्रवाई से भी ज्यादा महत्वपूर्ण निगरानी है, और महानगरों में तो खासकर जहां सीमित संसाधनों पर आबादी का बोझ बेहद ज्यादा है। दिल्ली का नया मास्टर प्लान जारी किया गया है। इसमें निर्माण संग सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए।