प्रेरणा की रोशनी

नवभारतटाइम्स.कॉम
kalam set an example of inspiration for students even when the power went out
यह घटना उस समय की है, जब ए.पी.जे. अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति बन चुके थे। एक कार्यक्रम में उन्हें विद्यार्थियों को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया था। कलाम अभी मंच पर पहुंचे ही थे कि बिजली चली गई। माइक समेत सभी उपकरण बंद हो गए। कर्मचारी जेनरेटर और माइक ठीक करने में जुट गए। मंच पर बैठे अतिथियों के चेहरों पर भी चिंता दिखाई देने लगी। लेकिन कलाम बिल्कुल शांत थे।कुछ क्षण बाद वह मंच से नीचे उतरे और हॉल के बीचोबीच जाकर खड़े हो गए। विद्यार्थियों को समझ नहीं आया कि वह क्या करने वाले हैं। तभी मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, ‘कोई बात नहीं, बिजली चली गई है। माइक बिना बिजली के काम नहीं कर सकता, लेकिन मैं बिना बिजली के बोल सकता हूं। आप सब मेरे पास आ जाइए, ताकि हम एक-दूसरे की बातें सुन सकें।’ इतना सुनते ही विद्यार्थी खुशी से उनके आसपास आ गए। तालियों से पूरा हॉल गूंज उठा। इसके बाद कलाम ने बिना माइक विद्यार्थियों से संवाद किया, उनके सवाल सुने और उन्हें विज्ञान और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उस दिन बिजली भले ही चली गई थी, लेकिन प्रेरणा की रोशनी देर तक जलती रही।