गुरुजी! जब अपना मकान है तो सरकारी घर क्यों?

नवभारतटाइम्स.कॉम
lucknow university government accommodation even after owning a house information sought from teachers
Zeeshan.Rayini @timesofindia.com

लखनऊ : लखनऊ विश्वविद्यालय में अब ऐसे शिक्षक जिनका लखनऊ में अपना मकान है, उन्हें सरकारी आवास छोड़ना पड़ सकता है। दरअसल, एलयू की ओर से आवास आवंटन के लिए अब सरकारी नीति पर अमल शुरू हो गया है। इसके तहत सभी शिक्षकों से जानकारी मांगी गई है कि किनके पास शहर में अपना मकान है। इसके लिए विवि ने शपथ पत्र भी देने को कहा है। एलयू में जो शिक्षक सरकारी मकान में रह रहे हैं, उनमें से कई के अपने मकान हैं।
 एलयू में शिक्षकों की संख्या लगभग 400 है, लेकिन इसकी तुलना में आवास सीमित हैं। पिछले कुछ वर्षों में 100 से अधिक शिक्षकों की भर्ती भी हुई है, जिसमें काफी शिक्षक दूसरे जिले या राज्यों से आए हैं। आवास सीमित होने के कारण एलयू इन शिक्षकों को आवास नहीं दे पा रहा है। वहीं, कई पुराने शिक्षकों ने लखनऊ में अपने मकान बनवा लिए हैं, लेकिन परिसर का आवास नहीं छोड़ा है। इसी के मद्देनजर शिक्षकों से शपथ पत्र मांगा गया है, ताकि लीगल कार्रवाई की जा सके।

25 फीसदी को ही घर : एलयू में वर्तमान में महज 25% शिक्षकों को ही आवास आवंटित किए जा सके हैं। एलयू के लगभग 350 कर्मचारी व शिक्षक कैंपस में रहते हैं। इसमें कर्मचारियों की संख्या 250 है और शिक्षकों की संख्या 100 है। यह शिक्षकों की कुल संख्या का महज 25% ही है। इसी वजह से सेल्फ फाइनैंस शिक्षकों को आवास आवंटन बंद हो गया है। न्यू कैंपस में इसी साल 6 सेल्फ फाइनैंस शिक्षकों से आवास खाली भी करवाए गए हैं। इनकी जगह पर कैंपस के नियमित शिक्षकों को आवास आवंटित किए गए हैं।

कर्मचारियों पर हो चुकी है कार्रवाई : एलयू में हाल में कई कर्मचारियों से आवास खाली करवाए हैं। इसमें कई कर्मचारी ऐसे हैं, जिनके आवास में कोई और रह रहा था। वहीं, कई कर्मचारियों ने सरकारी पर ताला लगाकर कब्जा कर रखा था। कर्मचारियों के बाद अब शिक्षकों की बारी है।

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