‘तलाक के बाद भी पति की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती’

Contributed byrajesh.choudhary,नई दिल्ली|नवभारतटाइम्स.कॉम
‘तलाक के बाद भी पति की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती’
नई दिल्ली: कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार 10 सितंबर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति की ओर से एकतरफा (एक्स-पार्टी) तलाक की डिक्री हासिल कर लेने से उसकी पूर्व पत्नी के भरण-पोषण की कानूनी जिम्मेदारी अपने आप खत्म नहीं हो जाती। यदि महिला ने दोबारा शादी नहीं की है और वह अपना गुजारा करने में सक्षम नहीं है तो वह सीआरपीसी की 125 के तहत भरण-पोषण की हकदार बनी रह सकती है। हाई कोर्ट ने अपने अहम फैसले में यह भी साफ किया है कि बालिग हो चुकी स्वस्थ और अविवाहित बेटी को धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता नहीं दिया जा सकता।

दंपती की शादी 11 फरवरी 1995 को हुई थी। उनके एक बेटा और एक बेटी हुई। बेटी का जन्म 15 अक्टूबर 1999 को हुआ था। वैवाहिक विवाद बढ़ने के बाद पति ने तलाक के लिए मुकदमा दायर किया। यह मुकदमा एक्स-पार्टी (बिना दूसरी पार्टी के पेश हुए चलने वाला मामला) चला और 20 जून 2022 को तलाक की डिक्री पारित हो गई। पत्नी ने इस डिक्री को रद्द कराने के लिए आवेदन दिया जो अभी पेंडिंग है। इस बीच पत्नी ने 2019 में CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट ने अंतरिम आदेश के जरिए कुल 3,500 रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश दिया था। इसमें पत्नी के लिए 1,500 रुपये और बेटी के लिए 2,000 रुपये शामिल थे।
पति ने हाई कोर्ट में दलील दी कि तलाक के बाद वैवाहिक संबंध खत्म हो चुके हैं, इसलिए पत्नी को गुजारा भत्ता देने की उसकी जिम्मेदारी भी समाप्त हो गई है। उसने यह भी कहा कि बेटी अक्टूबर 2017 में ही बालिग हो चुकी थी और वह स्वस्थ है।

हाई कोर्ट ने कहा कि पति द्वारा हासिल की गई तलाक की डिक्री से भी पूर्व पत्नी के भरण-पोषण की वैधानिक जिम्मेदारी अपने आप खत्म नहीं होती। हालांकि बेटी के मामले में हाई कोर्ट ने पति को राहत दी। कोर्ट ने कहा कि संगीता अक्टूबर 2017 में बालिग हो चुकी थी, जबकि धारा 125 की अर्जी 2019 में दाखिल हुई। वह किसी शारीरिक या मानसिक अक्षमता से पीड़ित भी नहीं थी। धारा 125(1)(c) CrPC के तहत बालिग संतान को तभी भरण-पोषण मिल सकता है, जब शारीरिक या मानसिक असामान्यता अथवा चोट के कारण वह अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हो।