‘लखनऊ साहित्य का पुराना केंद्र’

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lucknow becomes literary hub cm yogi inaugurates national book trusts book festival
nNBT न्यूज, लखनऊ : भारत की ज्ञान परंपरा श्रुति और स्मृति से आगे बढ़कर शास्त्रों, पांडुलिपियों, ताम्रपत्रों और अभिलेखों के जरिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ी है। लखनऊ साहित्य की ऐतिहासिक भूमि रही है, जहां के साहित्यकारों ने अपनी कालजयी रचनाओं से देश और समाज को नई दिशा दी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ विवि में नेशनल बुक ट्रस्ट के पांचवें गोमती पुस्तक महोत्सव का उद ् घाटन करते हुए ये बातें कहीं।

सीएम ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जब भी किताब खरीदने का मौका मिले, तो सिलेबस की किताबों के साथ रचनात्मकता और सकारात्मक सोच जगाने वाली पुस्तकों को तरजीह दें। किसी महापुरुष की आत्मकथा, उत्कृष्ट साहित्यिक रचना, धार्मिक ग्रंथ या वैज्ञानिक शोध जीवनभर प्रेरणा देते हैं।
प्रदर्शनी भी देखी : उद् घाटन से पहले मुख्यमंत्री ने परिसर में लगी पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने सीएम का पुस्तक भेंट कर स्वागत किया।

'साहित्य ज्ञानराशि का संचित कोश': उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने आचार्य रामचंद्र शुक्ल के कथन को याद करते हुए कहा कि साहित्य नए समाज के निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है।

'मिला वक्त दोबारा नहीं आता': माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि जीवन में कई चीजें दोबारा हासिल हो सकती हैं, लेकिन अध्ययन के लिए मिला समय कभी लौटकर नहीं आता।

'नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने की पहल' : बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि पुस्तक मेला नई पीढ़ी को किताबों, विचारों और समृद्ध साहित्यिक परंपरा से जोड़ने का बेहद सार्थक मंच है।