खुद को मकान मालिक बताने वाले किराएदार का दावा कोर्ट में खारिज

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tenants claim to become landlord rejected court says cannot adopt two stances simultaneously
Prachi.Yadav @timesofindia.com

nनई दिल्ली : पुरानी दिल्ली के एक किराए के मकान में दशकों से रह रहे किराएदार ने खुद को ही मालिक बताना शुरू कर दिया। इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा। किराएदार ने दलील दी कि लंबे समय से मकान मालिक ने उससे किराया नहीं लिया, इसलिए उसे प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक मिल गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने यह दलील सिरे से खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति एक ही समय में दो अलग-अलग रुख नहीं अपना सकता। अगर वह मकान मालिक के मालिकाना हक को ही नकार देता है तो फिर किराएदार के तौर पर कानूनी संरक्षण भी नहीं मांग सकता। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 7 सितंबर को अहाता किदारा, बाड़ा हिंदू राव स्थित प्रॉपर्टी के मामले में मो. महबूब की नियमित दूसरी अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही उसके खिलाफ प्रॉपर्टी खाली करने का आदेश भी बरकरार रहा। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रॉपर्टी का मालिकाना हक रखने वाली अर्शी कुरैशी और इरम ने बेदखली का मुकदमा दायर किया। उन्होंने बताया कि प्रॉपर्टी 1992 में रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए खरीदी गई थी। महबूब के पिता अल्लाह रक्खा को मूलरूप से 20 रुपये महीने के किराए पर जगह दी गई थी। बाद में किराया नहीं देने और बिना अनुमति स्ट्रक्चर में बदलाव पर विवाद हुआ। मालिकों ने किराएदारी खत्म करने के लिए कानूनी नोटिस भेजा। मामला कोर्ट पहुंचा तो महबूब ने नया दावा कर दिया। कहा कि इतने सालों तक किराया नहीं लिया गया, इसलिए वह प्रॉपर्टी का मालिक बन गया है। कोर्ट ने इस दलील को उसके खिलाफ ही माना।
कोर्ट ने कहा कि ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 111(g) के तहत किराएदार द्वारा मकान मालिक के मालिकाना हक से इनकार करने पर किराएदारी के अधिकार खत्म हो जाते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि महबूब ने खुद को किराएदार मानने से इनकार कर दिया था। इसलिए वह अनधिकृत कब्जेदार की स्थिति में आ गया और सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता।