फ्रेम के परे दिखा अतीत, मिथक और आधुनिकता का संगम

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beyond the frames exhibition at kalasrot art gallery a unique confluence of past myth and modernity
nNBT न्यूज, लखनऊ : अलीगंज स्थित कलास्रोत आर्ट गैलरी में रविवार से 'बियॉन्ड द फ्रेम्स' प्रदर्शनी का आगाज़ हुआ। प्रदर्शनी में मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता रामचंद्र खरातमाल और वर्षा खरातमाल की 'क्विल्ट-मोटिफ' (रजाई के पैटर्न) वाली कलाकृतियां रहीं, जिन्होंने घरेलू जीवन, रिश्तों की गर्माहट और नारी-मन की गहराइयों को बड़े ही जीवंत रूप में पेश किया।

गैलरी में घूमते हुए दर्शकों को जहां एक ओर राजस्थान के कलाकार गौरी शंकर सोनी की कला में मिट्टी की सोंधी महक और सुदृढ़ आकृतियों का जुड़ाव देखने को मिला, वहीं उमेंद्र प्रताप सिंह और सुकांता दास के चित्रों में मानवीय संवेदनाओं, यथार्थवाद और बंगाल की स्वप्निल-काव्यात्मक शैली की गहरी छाप नज़र आई। आदिवासी समकालीन कला का प्रतिनिधित्व करते हुए सीआर हेम्ब्रम की संताल परंपराओं और ब्रह्मांड-दर्शन पर आधारित कलाकृतियों ने लोगों को खूब आकर्षित किया। इसके साथ ही विश्वास एम की शहरी व प्रयोगात्मक सोच और तरन्नुम की शांति व ठहराव का अहसास कराने वाली कलाकृतियों ने प्रदर्शनी को एक पूर्णता प्रदान की। इस दौरान अनुराग डिडवानिया, मानसी डिडवानिया समेत कई कलाप्रेमी उपस्थित रहे।