BRICS के संदेश

नवभारतटाइम्स.कॉम
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BRICS को लेकर सबसे अधिक चिंता जताई जाती है उसमें अंतर्निहित विरोधाभासों पर। हालांकि नई दिल्ली में हुए सम्मेलन की सबसे खास बात यही रही कि सदस्य देशों ने एकजुटता दिखाई और इसमें भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इस सम्मेलन ने मंच को मौजूदा परिस्थितियों में और अधिक प्रासंगिक बना दिया है।

एकजुटता दिखाई । सबसे अहम बात रही साझा घोषणापत्र पर सहमति बनना। जब पश्चिम एशिया में हालात उलझे हुए हैं और हूतियों ने हमले तेज कर दिए हैं, तब ईरान और UAE के बीच संवाद एक दुर्लभ घटना है। घोषणापत्र में किसी देश का नाम लिए बिना नागरिक ढांचों पर हमले को लेकर जो चिंता जताई गई, उसने संतुलित रास्ता निकाला। इससे ईरान की चिंता को जगह मिली। जॉइंट डिक्लेरेशन पर सहमति इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की पिछली बैठक में ऐसा नहीं हो पाया था। एकजुटता के इस संदेश से मंच को मजबूती मिलेगी।
सुधार का वक्त । अगला सबसे बड़ा मेसेज रहा ग्लोबल साउथ को लेकर। वैश्विक संकटों की मार सबसे ज्यादा इसी पर पड़ रही है, पर फैसलों में यह सबसे पीछे है। पीएम नरेंद्र मोदी का यह कहना महत्वपूर्ण है कि वैश्विक फैसलों में ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़नी चाहिए और उसे 'नियम मानने वाले' से 'नियम बनाने वाले' की भूमिका में लाना होगा। इसके लिए जरूरी है UNSC में सुधार, जिसे अब टाला नहीं जा सकता। साथ ही, इन देशों के बीच आपसी समन्वय और सहयोग बढ़ाने की भी जरूरत है। पिछले कुछ बरसों में ग्लोबल सप्लाई चेन जिस तरह बार-बार बाधित हुई है, उसमें कोई देश खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता। टेक्नॉलजी और क्रिटिकल मिनरल्स पर नियंत्रण की कोशिश से बात और बिगड़ेगी।

समावेशी समूह । जब भी BRICS की बात होती है, तो यह मुद्दा जरूर उठता है कि क्या यह संगठन पश्चिम को चुनौती दे सकता है? भारत की ओर से यह स्पष्ट संदेश आया कि ब्रिक्स सभी को साथ लेकर चलने वाला समूह है। यही आज के दौर की जरूरत भी है। दुनिया जितनी बहुध्रुवीय होगी और आपसी रिश्ते खुलेंगे, उससे संकटों का सामना करने की ताकत मिलेगी।

भारत-चीन संबंध । ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता चीन के पास है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, सहयोगी हैं। हालांकि ऐसे बयानों की असली परीक्षा जमीन पर होती है। तनाव के बीच भी दोनों देशों के बीच व्यापार होता रहा था। असल बात है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर इनमें आपस में कितनी बन पाती है। बाहर के द्विपक्षीय रिश्ते मंच के भीतर के डायनामिक्स पर भी असर डालेंगे।