शिक्षकों के समायोजन में जिले लापरवाह

नवभारतटाइम्स.कॉम
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n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : सरप्लस शिक्षकों के पुनर्समायोजन और स्थानांतरण से जुड़े मामलों में हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी कुछ जिले लापरवाही बरत रहे हैं। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने शिक्षकों की सुनवाई के लिए 10 सितंबर तक टाइमलाइन तय की थी, लेकिन, 11 जिलों ने कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है। अब निदेशालय ने सख्त हिदायत देते हुए अब 18 अक्टूबर तक का वक्त दिया है।

दरअसल, विभाग ने परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 31,685 शिक्षकों को सरप्लस चिह्नित किया गया है, जिन्हें शिक्षकविहीन अथवा एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में समायोजित किया जाना है। इस प्रक्रिया में शिक्षकों द्वारा वरिष्ठता, तैनाती और आंकड़ों में कथित त्रुटियों को लेकर आपत्तियां दर्ज करवाई गई थीं। सौरभ कुमार सिंह एवं अन्य बनाम यूपी मामले में 20 जुलाई को हाई कोर्ट ने प्रभावित शिक्षकों को अंतिम अवसर देते हुए सीमित आधारों पर आपत्तियां दाखिल करने और उनकी सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। साथ ही सुनवाई व्यक्तिगत रूप से अथवा विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करने की अनुमति दी थी।
10 सितंबर तक की जानी थी सुनवाई : बेसिक शिक्षा निदेशालय ने हाई कोर्ट के आदेश के क्रम में 10 सितंबर तक अपीलों के निस्तारण का वक्त दिया था, लेकिन, मऊ, फतेहपुर, बागपत, आगरा, फिरोजाबाद, बरेली, वाराणसी, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़ और चित्रकूट से अब तक रिपोर्ट नहीं मिली है। अब निदेशालय ने दोबारा निर्देश जारी कर कहा है कि कि जिन मामलों में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई हो चुकी है अथवा संबंधित शिक्षक को सुनवाई का अवसर नहीं मिला है, वहां नियमानुसार कार्रवाई कर अपीलों का निस्तारण किया जाए। बीएसए से कहा गया है कि यह प्रक्रिया हाई कोर्ट के आदेश से चल रही है इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।