कच्ची घानी का तेल

नवभारतटाइम्स.कॉम•
kachhi ghani oil the benchmark of purity and traditional method
‘घानी’ शब्द सुनते ही आमतौर पर तेल निकालने के पारंपरिक तरीके का खयाल आता है। घानी एक पारंपरिक यंत्र है। लकड़ी की बनी ओखली में तिल, सरसों, मूंगफली या दूसरे तिलहनों को डालते हैं। फिर बैल की मदद से घानी को घुमाया जाता है और यूं मिलता है तेल। चूंकि इसमें बीजों को बिना गर्म किए ही दबाया जाता है, तो इसे कहते हैं ‘ कच्ची घानी का तेल ’। अब इसे शुद्धता का पैमाना माना जाता है। यही कारण है कि आजकल कच्ची घानी के तेल की डिमांड ज्यादा है। हालांकि ‘घानी’ का अर्थ केवल तेल निकालने वाले यंत्र तक सीमित नहीं है। बिहार और झारखंड के कुछ इलाकों में घान शब्द का इस्तेमाल मात्रा की इकाई के अर्थ में भी होता है। जैसे एक बार में कड़ाही में जितनी पूरियां या जलेबियां जाती हैं या चक्की में जितना अनाज पीसा जाता है, उसे एक 'घान' कहा जाता है। पकौड़े और भूनी-तली जाने दूसरे तरह के पकवानों के लिए भी इस शब्द का इस्तेमाल होता है। जैसे कहते हैं- घान उतार दो, घान डाल दो वगैरह।