उपराष्ट्रपति ने मावीरन ओंडिवीरन को नमन, राजीव गांधी की जयंती पर भी किया स्मरण
उपराष्ट्रपति ने मावीरन ओंडिवीरन को नमन, राजीव गांधी की जयंती पर भी किया स्मरण
NewsPoint•
नई दिल्ली, 20 अगस्त. उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज दो महत्वपूर्ण हस्तियों को याद किया. उन्होंने तमिलनाडु के वीर स्वतंत्रता सेनानी मावीरन ओंडिवीरन के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और साथ ही पूर्व Prime Minister राजीव गांधी की जयंती पर भी उनकी स्मृति को नमन किया. उपराष्ट्रपति ने अपने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से दोनों नेताओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया.
उपराष्ट्रपति ने मावीरन ओंडिवीरन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “मावीरन ओंडिवीरन की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं. औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष में उनके शौर्य और बलिदान को याद करता हूं.” उन्होंने बताया कि ओंडिवीरन महान पालयकारर पुली थेवर की सेना में एक भरोसेमंद सेनापति थे. उनका मुख्यालय नेरकट्टुमसेवल में था. ओंडिवीरन ने ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना के खिलाफ असाधारण साहस दिखाया था. उपराष्ट्रपति ने आगे कहा, “उनकी बहादुरी, देशभक्ति और बलिदान की भावना विदेशी शासन के खिलाफ India के प्रतिरोध के इतिहास का एक अमर अध्याय है.” उन्होंने यह भी कहा कि उनकी वीर विरासत को याद करते हुए, मातृभूमि के प्रति उनकी अटूट निष्ठा आने वाली पीढ़ियों को साहस, त्याग और राष्ट्रीय गौरव के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करती रहे. मावीरन ओंडिवीरन 18वीं शताब्दी के एक कमांडर और तमिलनाडु के स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. उनका निधन 20 अगस्त 1771 को हुआ था.इसी कड़ी में, उपराष्ट्रपति ने पूर्व Prime Minister राजीव गांधी की जयंती पर भी एक पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, “पूर्व Prime Minister राजीव गांधी की जयंती पर मैं उनकी स्मृति को नमन करता हूं और राष्ट्र की सेवा और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को याद करता हूं.” राजीव गांधी की जयंती 20 अगस्त को मनाई जाती है और इस दिन को सद्भावना दिवस के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन पूरे India में राष्ट्रीय एकता, शांति और सद्भाव का संदेश दिया जाता है. उपराष्ट्रपति के इन दोनों संदेशों से यह स्पष्ट होता है कि वे देश के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान देने वाले नेताओं को समान रूप से महत्व देते हैं. यह दर्शाता है कि देश के इतिहास और उसके नायकों का सम्मान करना कितना महत्वपूर्ण है. उपराष्ट्रपति ने दोनों ही महान विभूतियों के देश के प्रति योगदान को रेखांकित किया.