तंजावुर में सांबा सीजन के लिए बीज विक्रेताओं हेतु सख्त गाइडलाइंस जारी, गुणवत्ता पर जोर

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Navbharat Times
तमिलनाडु के तंजावुर जिले में सांबा सीजन की धान की खेती शुरू होने वाली है। इस मौके पर, प्रशासन ने निजी बीज विक्रेताओं के लिए सख्त नियम बनाए हैं। विक्रेताओं को सिर्फ सांबा सीजन के लिए सही धान की किस्में ही बेचनी होंगी। उन्हें बीज प्रमाणन और रिकॉर्ड रखने के नियमों का भी कड़ाई से पालन करना होगा। यह कदम किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने और किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचाने के लिए उठाया गया है।

सांबा सीजन, जो तमिलनाडु में धान की खेती का एक अहम दौर है, आमतौर पर अगस्त से जनवरी तक चलता है। इस सीजन के लिए किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज मिलें, यह सुनिश्चित करने के लिए यह गाइडलाइन जारी की गई है। बीज निरीक्षण के उप निदेशक सुजाता ने बताया कि जिले भर के किसान इस सीजन की खेती की तैयारी में जुटे हैं।
विक्रेताओं को अब बीज के पैकेट पर दो टैग लगाने होंगे। एक होगा प्रमाणन टैग और दूसरा जानकारी वाला टैग। ये दोनों टैग सफेद या नीले रंग के होने चाहिए। जानकारी वाले टैग पर बीज अधिनियम के अनुसार 14 जरूरी बातें लिखी होनी चाहिए। इसमें फसल का नाम, किस्म, बैच नंबर, एक्सपायरी तारीख और यह बीज किस सीजन के लिए सबसे अच्छा है, जैसी जानकारी शामिल होगी।

इसके अलावा, सभी निजी डीलरों को बीज स्टॉक रजिस्टर और अंकुरण रिपोर्ट अपने पास रखनी होगी। हर लॉट के बीज का स्टॉक अलग-अलग पन्नों पर दर्ज करना होगा। इससे जांच और निगरानी में आसानी होगी।

सांबा सीजन के लिए 150 से 160 दिन में पकने वाली लंबी अवधि की धान की किस्में सबसे अच्छी मानी जाती हैं। डीलरों को सबसे पहले सावित्री सीआर 1009, सीआर 1009 सब-1 और एडीटी 51 जैसी किस्मों को बेचने की सलाह दी गई है। इसके बाद, एडीटी 38, एडीटी 39, एडीटी 42, एडीटी 46, व्हाइट पोन्नी, आईआर 20, सीओ 43, सीओ 46, सीओ 50 और इम्प्रूव्ड व्हाइट पोन्नी जैसी मध्यम अवधि की किस्में बेची जा सकती हैं।

अगर कोई डीलर तमिलनाडु के बाहर की किस्में जैसे बीपीटी 5204, एमटीयू 7029, एनएलआर 34449 और केएनएम 1638 बेचता है, तो उसे फॉर्म II का रिकॉर्ड रखना होगा। यह बहुत जरूरी है। साथ ही, हर किसान को बीज खरीदने पर पक्की रसीद देना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

फिलहाल, जिले की निजी दुकानों पर बिक्री के लिए करीब 2,750 टन लंबी और मध्यम अवधि के धान के बीज का स्टॉक किया गया है। बीज की अंकुरण गुणवत्ता की जांच के लिए कुंभकोणम, तंजावुर और पट्टुकोट्टई में तैनात बीज निरीक्षक आधिकारिक सैंपल ले रहे हैं। इन सैंपलों को जांच के लिए तंजावुर की बीज परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।

सुजाता ने साफ चेतावनी दी है कि अगर किसी भी डीलर ने सांबा सीजन के लिए अनुपयुक्त किस्मों की बिक्री की या नियमों का उल्लंघन किया, तो उस पर बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 और बीज नियंत्रण आदेश 1983 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

डीलरों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे किसान को बीज देने से पहले हर लॉट का लेबल, अंकुरण रिपोर्ट और सीजन के हिसाब से उसकी उपयुक्तता जरूर जांच लें। इस मामले में किसी भी तरह की ढील नहीं बरती जाएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि किसानों को सही बीज मिले और उनकी फसल अच्छी हो।