पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति: जमीन मालिकों को मिलेगा हिस्सेदारी का मौका, सितंबर में घोषणा
पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति: जमीन मालिकों को मिलेगा हिस्सेदारी का मौका, सितंबर में घोषणा
NewsPoint•
कोलकाता, 24 अगस्त: पश्चिम बंगाल की नई सरकार सितंबर के मध्य तक अपनी नई औद्योगिक नीति लाने की तैयारी में है। इस नीति में जमीन मालिकों को औद्योगिक इकाइयों में हिस्सेदार बनाने का एक खास प्रस्ताव शामिल हो सकता है। सरकार का मकसद जमीन अधिग्रहण की दिक्कतों को दूर करना है, जो पहले भी एक बड़ी समस्या रही है। बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली पिछली वाम मोर्चा सरकार के समय भी जमीन अधिग्रहण को लेकर सिंगुर और नंदीग्राम जैसे इलाकों में बड़े आंदोलन हुए थे। नई नीति में जमीन मालिकों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से उद्योगों से जोड़ने के दो मुख्य तरीके सुझाए गए हैं।
नई औद्योगिक नीति में जमीन मालिकों को उद्योगों में हिस्सेदार बनाने के लिए दो रास्ते सुझाए गए हैं। पहला रास्ता यह है कि जमीन मालिक परिवार के किसी एक सदस्य को उस औद्योगिक इकाई में नौकरी दी जाए। दूसरा रास्ता यह है कि जमीन मालिकों को ऐसे छोटे-मोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए जो मुख्य औद्योगिक इकाई की जरूरतों को पूरा करते हों। ये व्यवसाय 'अप्रत्यक्ष सहयोग' वाले माने जाएंगे।राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि बड़ी औद्योगिक इकाइयों में अक्सर सहायक उद्योगों की जरूरत होती है। ये सहायक उद्योग 'प्रत्यक्ष' या 'अप्रत्यक्ष' दोनों तरह के हो सकते हैं। 'प्रत्यक्ष सहयोग' वाले उद्यमी वे होते हैं जो मुख्य उद्योगों के लिए खास तरह के तकनीकी उपकरण बनाते हैं। ऐसे उद्योगों में जमीन मालिकों को हिस्सेदार बनाने की गुंजाइश कम होती है। लेकिन, 'अप्रत्यक्ष सहयोग' वाले उद्योगों में जमीन मालिकों को हिस्सेदार बनाने की अच्छी खासी गुंजाइश है।
'अप्रत्यक्ष सहयोग' वाले उद्योगों के कुछ उदाहरण भी दिए गए हैं। जैसे, जमीन मालिक मिलकर एक सिलाई इकाई चला सकते हैं जो फैक्ट्री के कर्मचारियों के लिए यूनिफॉर्म बनाती हो। या फिर, वे मिलकर एक कैंटीन चला सकते हैं जो फैक्ट्री स्टाफ के लिए लंच-बॉक्स सप्लाई करती हो। इस तरह के छोटे-छोटे व्यवसाय मुख्य उद्योग के लिए मददगार साबित होते हैं और जमीन मालिकों को भी फायदा पहुंचाते हैं।
राज्य के वाणिज्य और उद्योग मंत्री तापस रॉय ने इस महीने की शुरुआत में ही बताया था कि नई औद्योगिक नीति उन क्षेत्रों को बढ़ावा देगी जहां छोटे सहायक व्यवसायों की मांग ज्यादा है। इन क्षेत्रों में टेक्सटाइल और गारमेंट्स, लोहा और स्टील, भारी बिजली के उपकरण, ऑटोमोटिव उद्योग, और आईटी व इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं।
उत्तर बंगाल के लिए, नई औद्योगिक नीति में 'ट्रिपल-टी' यानी चाय, लकड़ी और पर्यटन पर खास ध्यान दिया जाएगा। यह नीति इन क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने का काम करेगी।
सरकार का मानना है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आसान बनाने और स्थानीय लोगों को उद्योगों से जोड़ने से राज्य में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पहले की सरकारों के समय जमीन अधिग्रहण को लेकर जो विरोध प्रदर्शन हुए थे, उनसे सबक लेते हुए यह नई नीति जमीन मालिकों के हितों का ध्यान रखने की कोशिश करेगी।
यह नई नीति पश्चिम बंगाल के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है। जमीन मालिकों को सीधे तौर पर उद्योगों से जोड़कर, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि विकास का लाभ सभी तक पहुंचे। यह एक ऐसा कदम है जो राज्य में आर्थिक विकास को नई गति दे सकता है।
नई नीति का उद्देश्य उद्योगों के लिए जमीन की उपलब्धता को सुगम बनाना है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना है कि जमीन देने वाले स्थानीय लोगों को भी इसका सीधा फायदा मिले। यह एक जीत-जीत की स्थिति बनाने का प्रयास है, जहां उद्योग फलेंगे-फूलेंगे और स्थानीय समुदाय भी आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।
यह नीति उन छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बढ़ावा देगी जो बड़े उद्योगों के लिए सहायक के रूप में काम करते हैं। इससे एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होगा।
सरकार का यह कदम दिखाता है कि वह राज्य में औद्योगिक विकास को लेकर गंभीर है और इसके लिए नए और प्रभावी तरीके अपनाने को तैयार है। सितंबर के मध्य तक इस नीति के लागू होने की उम्मीद है, जिसके बाद पश्चिम बंगाल में एक नए औद्योगिक युग की शुरुआत हो सकती है।